खास बातें
Firhad Hakim TMC Kolkata Port: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘बॉबी’ एक ऐसा नाम है, जिसका दबदबा नबान्न (राज्य सचिवालय) की 14वीं मंजिल से लेकर कालीघाट तक है. कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी की कैबिनेट के सबसे भरोसेमंद मंत्रियों में शुमार 67 वर्षीय फिरहाद हकीम इन दिनों एक नये अवतार में हैं.
फिटनेस पर रहता है बॉबी का फोकस
कभी ‘एक व्यक्ति एक पद’ की नीति के अपवाद माने जाने वाले बॉबी हकीम यानी फिरहाद हकीम ने अब राजनीति के साथ-साथ अपनी फिटनेस पर भी शार्प फोकस किया है. चेतला पार्क में सुबह की सैर हो या जिम में पसीना बहाना, मेयर साहब अब खुद को राजनीति की रिंग का असली हैवीवेट खिलाड़ी बनाये रखने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं.
बॉक्सर नहीं, सियासत के रिंग के चैंपियन निकले बॉबी
फिरहाद हकीम के ‘बॉबी’ नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है. उनके पिता अब्दुल हकीम मशहूर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बॉबी सिम्पसन के बहुत बड़े प्रशंसक थे. उन्हीं के नाम पर उन्होंने अपने बेटे का नाम बॉबी रखा था. उनके पिता चाहते थे कि बेटा नामी बॉक्सर (मुक्केबाज) बने. नियति ने उन्हें बॉक्सर तो नहीं बनाया, लेकिन आज वह बंगाल की राजनीति के ऐसे ‘वेटलिफ्टर’ हैं, जिनके सामने बड़े-बड़े अधिकारी भी सहमे रहते हैं.
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जब भाग खड़ा हुआ पिस्तौल लेकर आया बदमाश
बॉबी हकीम के जीवन का एक ऐसा ‘दबंग’ किस्सा है, जो आज भी पोर्ट इलाके में मशहूर है. कोलकाता पोर्ट इलाके से फिरहाद पहली बार विधायक बने थे. तब खिदिरपुर में उनके दफ्तर में एक शख्स हाथ में पिस्तौल लेकर घुस आया. वहां मौजूद लोग खौफ से कांप रहे थे. बॉबी ने कुर्सी छोड़ते हुए एक जोरदार लात मारी और सामने वाली मेज को पलट दिया. अचानक हुए इस हमले से बदमाश हक्का-बक्का रह गया और भाग खड़ा हुआ. उसी दिन से लोग उन्हें राजनीति का ‘दबंग हीरो’ कहने लगे.
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मीठा खाना छोड़ा, चेतला में ‘महालमिलन’ जारी
67 की उम्र में खुद को सक्रिय रखने के लिए फिरहाद हकीम कड़ा अनुशासन अपना रहे हैं. सीपीआईएम (CPIM) के दौर में आंदोलनों के दौरान उन्हें कमर में गंभीर चोट लगी थी. वह चोट आज भी उन्हें परेशान करती है. बेटी प्रियदर्शिनी की सलाह पर उन्होंने मीठे से पूरी तरह तौबा कर ली है. मेयर होने के बावजूद वह चेतला बाजार के ‘महालमिलन’ के अड्डे पर नियमित जाते हैं. वहां सत्ता पक्ष और विपक्ष, सभी के साथ उनकी गपशप चलती है. अगर कोई पड़ोसी बिल्ली के फंसने की शिकायत करे, तो वह कसरत बीच में छोड़कर उसे बचाने निकल पड़ते हैं.
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Firhad Hakim TMC Kolkata Port: नबान्न में दबदबा, पोती के सामने मोम
फिरहाद हकीम का अंदाज निराला है. वह नबान्न के अधिकारियों को उनकी गलती पर फटकार लगाने में देर नहीं करते, लेकिन अपनी छोटी-सी पोती आयत के सामने वह एकदम नरम हो जाते हैं. नबान्न से कालीघाट तक उनकी सीधी पहुंच उन्हें टीएमसी (TMC) का सबसे ताकतवर नेता बनाती है.
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