संजय सागर
Hazaribagh (बड़कागांव): बड़कागांव थाना क्षेत्र के बादम स्थित राउतपारा के समीप संचालित अवैध कोयला खदान में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया. कोयला उत्खनन के दौरान अचानक चाल धंसने और मलबा गिरने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर घायल बताए जा रहे हैं. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. लोगों का आरोप है कि घटना की लीपा-पोती करने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार मृतक की पहचान बादम पंचायत के राउतपारा निवासी जुगल साव के पुत्र सचिन साव के रूप में की गई है.
घायल मजदूरों का स्थानीय स्तर पर उपचार चल रहा है. हालांकि देर शाम तक प्रशासन की ओर से घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई.
शव हटाने और मामला दबाने का आरोप
हादसे के बाद मामले को दबाने की कोशिश के आरोप भी सामने आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि घटना के तुरंत बाद मृतक के शव को घटनास्थल से हटाकर दूसरे स्थान पर ले जाया गया. आशंका जताई जा रही है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए घटना को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास किया गया. कोयलांचल क्षेत्रों में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां अवैध खनन के दौरान मौत होने पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की जाती रही है. अवैध खनन के नेटवर्क पर उठे सवाल घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्र में अवैध कोयला खनन और तस्करी के नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं.
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाया बड़ा आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि बादम कोल परियोजना के आसपास लंबे समय से दर्जनों अवैध मुहानों के जरिए कोयला निकाला जा रहा है. प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाती, तो इस तरह की घटना को टाला जा सकता था. फिलहाल पुलिस और खनन विभाग की ओर से किसी भी प्रकार का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. प्रशासनिक पुष्टि और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
वन क्षेत्रों में दर्जनों अवैध कोयला खदान
बड़कागांव में कई वन एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध खदानें संचालित होने की शिकायतें हैं. इनमें प्रमुख रूप से तिलैया, कुरहा, खपिया, इंदिरा, पसेरिया, मलडीह घाटी, कुंदरू पलांडू गोंदलपुरा , राउतपारा, बेलवाटोंगरी, लकुरा, पंकरी बरवाडीह, समेत दर्जनों क्षेत्रों में सैकड़ों अवैध कोयला खदान लंबे समय से संचालित हो रहा है. रिपोर्टों में कहा गया है कि इन इलाकों में कई स्थानों पर सुरंगनुमा अवैध खदानें बनाई गई हैं, जहां मजदूर जोखिम उठाकर कोयला निकालते हैं. हालांकि बीच-बीच में वन विभाग द्वारा डोजरिंग का कार्य भी कोरम पूरा करने के लिए किया जाता रहा है.
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