जलमीनार तो खड़ा है, लेकिन सोलर प्लेट व समरसिबल गायब

गुमला के हीरानगर में लाखों की लागत से बना जलमीनार बेकार पड़ा है. सोलर प्लेट और समरसिबल गायब होने से 200 ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.

प्रतिनिधि, गुमला

गुमला शहर से सटी पुग्गु पंचायत अंतर्गत हीरानगर में हर घर नल जल योजना से लाखों रुपये की लागत से बना जलमीनार स्थानीय लोगों के लिए सफेद हाथी के दांत की तरह साबित हो रहा है. गुमला-रांची मुख्य मार्ग पर शहर से करीब साढ़े तीन किमी दूर बसे हीरानगर की आबादी करीब 200 है. यह इलाका ड्राइजोन है. जहां पानी की भारी किल्लत है. पानी कि किल्लत को दूर करने और लोगों के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में हर घर नल जल योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से जलमीनार लगाया गया. पाइप बिछाकर लोगों के घर के बाहर में नल लगाया गया. लेकिन दुर्भाग्य ही है कि लाखों रुपये खर्च किये जाने के बावजूद अब तक उक्त जलमीनार से लोगों को एक बूंद भी पानी नसीब नहीं हुआ है और अब जलमीनार तो खड़ा है, लेकिन जलमीनार का सोलर प्लेट व समरसिबल गायब है.

ग्रामीणों के अनुसार जलमीनार बनने के बाद से बेकार पड़ा हुआ है. ग्रामीण बतातें हैं कि पठारी क्षेत्र होने के कारण वहां बोरिंग व कुआं नहीं है. लोग पीने का पानी टोला के पीछे लगभग दो किमी दूर पहाड़ के नीचे स्थित एक खेत के डाड़ी कुआं से लाते हैं. गांव की सड़क व खेती की पगडंडियों से होते हुए पानी लाने जाते हैं. इसके अतिरिक्त टोला से नेशनल हाईवे पथ के उस पार करीब एक किमी दूर स्थित हवाई अड्डा के चापानल से भी पानी लाते हैं. टोला के सामने ही नेशनल हाईवे पथ के उस पर पानी फिल्टर प्लांट है. वहां से कभी-कभी पानी लाते हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी के इंतेजार में अब तो उनके घर के बाहर लगा नल भी टूटकर बेकार हो गया है.

ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार में लगाया गया सोलर प्लेट व समरसिबल गायब है. कुछ माह पहले टूना नामक एक मिस्त्री आया था. वह मिस्त्री सोलर प्लेट व समरसिबल को खोलकर अपने साथ ले गया. ग्रामीणों ने बताया कि जब वह मिस्त्री सोलर प्लेट व समरसिबल ले जा रहा था. उस समय मिस्त्री ने बताया था कि सोलर प्लेट व समरसिबल खराब हो गया है. बनाकर लगाने के बाद पानी मिलना शुरू हो जायेगा. लेकिन महीनों गुजर गये. अभी तक जलमीनार में सोलर प्लेट व समरसिबल नहीं लगाया गया है. ग्रामीणों ने गुमला प्रशासन से जलमीनार को शुरू करवाने की मांग की है.


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By Durjay paswan

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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