गुमलाः घाघरा प्रखंड की अरंगी पंचायत में विकास योजनाओं के नाम पर राशि की निकासी का मामला सामने आया है. पंचायत के खंभिया गांव में संजय साहू के घर के पास आरसीसी पुलिया निर्माण की योजना स्वीकृत हुई, लेकिन धरातल पर काम शुरू तक नहीं हुआ. योजना स्थल पर एक कुदाल तक नहीं चली और दो किस्तों में 2.24 लाख रुपए की निकासी कर ली गई. मामला 15वें वित्त आयोग की योजना से जुड़ा है. ग्रामीणों ने योजना में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
पुलिया बनी नहीं, दो किस्तों में निकल गए 2.24 लाख
योजना का नाम ‘खंभिया में संजय साहू के घर के पास आरसीसी पुलिया का निर्माण’ है. योजना संख्या 8/2025-26 के तहत इसकी प्राक्कलित राशि 2.50 लाख रुपए थी. ग्रामीणों के अनुसार, योजना स्थल पर पुलिया निर्माण तो दूर, कोई काम ही नहीं हुआ. इसके बावजूद योजना की राशि दो किस्तों में निकाल ली गई. पहली किस्त में 1.15 लाख रुपए और दूसरी किस्त में 1.07 लाख रुपए की निकासी हुई. इस तरह कुल 2.24 लाख रुपए की राशि निकाल ली गई.
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बारिश में तालाब बन जाता है योजना स्थल
ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर पुलिया निर्माण की योजना स्वीकृत की गई है, वहां बरसात के दिनों में काफी पानी जमा हो जाता है. अधिक बारिश होने पर आसपास के घरों में भी पानी घुस जाता है. इसी समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से यहां आरसीसी पुलिया निर्माण की मांग रखी थी. इसके बाद योजना स्वीकृत हुई, लेकिन योजना धरातल पर उतरने के बजाय राशि की निकासी कर ली गई.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिया का निर्माण हो जाता तो बरसात के दिनों में लोगों को काफी राहत मिलती. ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर दोषी पदाधिकारियों और कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि सुदूरवर्ती गांवों में विकास योजनाओं के नाम पर इस तरह की गड़बड़ी पर रोक लगाना जरूरी है.
मापी पुस्तिका और जियो टैग को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने योजना के तकनीकी पक्ष पर भी सवाल उठाए हैं. पंचायत के कनीय अभियंता जीवन एक्का द्वारा योजना की मापी पुस्तिका तैयार किए जाने की बात सामने आई है. ग्रामीणों का आरोप है कि जब योजना स्थल पर काम हुआ ही नहीं, तो मापी पुस्तिका कैसे तैयार कर दी गई.
ग्रामीणों के अनुसार, किसी भी योजना में काम शुरू होने से पहले और काम पूरा होने के बाद जियो टैग फोटो लिया जाता है. आरोप है कि इस योजना में भी जियो टैग की प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि स्थल पर निर्माण कार्य नहीं हुआ. योजना से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाएं कनीय अभियंता की देख-रेख में पूरी होती हैं. ऐसे में ग्रामीणों ने पूरे तकनीकी रिकॉर्ड की जांच की मांग की है.
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पंचायत सचिव की भूमिका पर भी उठे सवाल
योजना की कागजी प्रक्रिया को लेकर पंचायत सचिव आशिक मीर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. पंचायत की योजनाओं से संबंधित कागजी प्रक्रिया काम शुरू होने से लेकर योजना बंद होने तक पंचायत सचिव द्वारा पूरी की जाती है. राशि निकासी के लिए तैयार किए गए दस्तावेजों पर पंचायत सचिव के हस्ताक्षर के बाद मुखिया के हस्ताक्षर किए जाते हैं और इसके बाद राशि की निकासी होती है.
ग्रामीणों का आरोप है कि इस योजना में बिना काम किए ही कागजी प्रक्रिया पूरी कर राशि निकाल ली गई. ऐसे में पंचायत सचिव से लेकर योजना से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
दोषी मिले तो प्राथमिकी और राशि की रिकवरी : डीपीआरओ
मामले में जिला पंचायती राज पदाधिकारी (डीपीआरओ), गुमला डॉ शिशिर कुमार सिंह ने कहा कि वे खुद योजना स्थल पर जाकर जांच करेंगे. जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और राशि की रिकवरी की जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि को-ऑर्डिनेटर भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी. इधर, मामले में अरंगी पंचायत के कनीय अभियंता और पंचायत सचिव से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों से संपर्क नहीं हो सका.
