हमारे पूर्वज अंग्रेजों व जमींदारों से लड़े, आज हमारी जमीन से बेदखल करने में लगी है सरकार

गुमला शहर से आठ किमी दूर लटठा बरटोली गांव के कई परिवार ने भारत माला परियोजना सड़क के लिए अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया है.

गुमला गुमला शहर से आठ किमी दूर लटठा बरटोली गांव के कई परिवार ने भारत माला परियोजना सड़क के लिए अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया है. लेकिन दूसरी तरफ सरकार ने सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. चैरअंबा से शुरू हो रहे भारत माला सड़क का काम तेजी से हो रहा है. अभी मिट्टी भरकर सड़क को ऊंचा किया जा रहा है. सड़क पर मिट्टी भराई का काम अब लटठा बरटोली गांव तक पहुंचने वाला है. लेकिन इस गांव के कई परिवार जिनकी जमीन भारत माला परियोजना में जा रही है. उसका विरोध शुरू कर दिया है. टाना भगतों ने कहा है कि हमारे पूर्वज अंग्रेजों व जमींदारों से लड़े. आज सरकार हमारी जमीन से बेदखल करने में लगी है. सड़क बनाकर जल, जंगल, जमीन व पहाड़ को नष्ट किया जा रहा है. इसी जल, जंगल, पहाड़ को जिंदा रखने के लिए हमलोग हजारों सालों से गांवों में रह रहे हैं. लेकिन अब सरकार इसे पलभर में बर्बाद करने में तूली है. ग्रामीणों का आरोप है. प्रशासन की गलत रिपोर्ट के कारण सड़क निर्माण का रूट बदल दिया गया. सरकारी गजट के अनुसार भारत माला परियोजना की सड़क गुमला शहर के बाइपास सड़क से होकर बनने वाली थी जो सिलम, रायडीह होते हुए छत्तीसगढ़ को जोड़ती. लेकिन एक साजिश के तहत सरकारी गजट के विरुद्ध जाकर गुमला प्रशासन ने हमारे गांव की जमीन सड़क बनाने के लिए सरकार को दे दी. हउवा उरांव हम सड़क बनाने के लिए जमीन नहीं देंगे. अगर हम अपनी जमीन दे देंगे तो फिर खेतीबारी कहां करेंगे. आज जमीन लेकर सरकार हमें चंद रुपये दे देगी. जब पैसा खत्म हो जायेगा. उसके बाद हम क्या करेंगे. आज हमारी धरती मां है तो यहां फसल उपजाकर हम सालों पर पेट पालते हैं. बच्चों की परवरिश कर रहे हैं. कार्तिक टाना भगत यह हमारी जमीन है. हमलोग भारत माला परियोजना के लिए जमीन नहीं दिये हैं. लेकिन यहां जबरन सड़क बनायी जा रही है. जो कंपनी सड़क बना रही है. उसका साथ गुमला पुलिस दे रही है. इसलिए जब भी हमलोग विरोध करते हैं. गुमला पुलिस गांव आ जाती है और हमलोगों को बेवजह परेशान करती है. अभिषेक उरांव हमारी जमीन है. लेकिन सरकार हमारी जमीन छीनने में लगी हुई है. हम ग्रामीण अपनी जमीन पर सड़क बनाने से रोक रहे हैं तो प्रशासन गांव आकर हमें परेशान कर रहा है. यहां तक कि मारपीट भी किया गया है. अब हम ग्रामीण बड़ा आंदोलन करेंगे. अगर प्रशासन गांव आकर परेशान करेगा तो सभी पर केस करेंगे. काजल देवी गांव में सड़क निर्माण को लेकर कोई बैठक नहीं हुई. प्रशासन अपने मन से सड़क को भारत माला परियोजना के लिए दे दिया. सबसे बड़ी ग्राम सभा है. बिना ग्रामसभा के कैसे सड़क बन रही है. यहां हम आदिवासियों को उजाड़ने व बेघर करने का प्रयास सरकार कर रही है. जीते जी यहां सड़क बनने नहीं दिया जायेगा. टिबरू मुंडा, ग्राम प्रधान रेल चढ़ा दे या जेल भेज दे. हम झुकने वाले नहीं है. जल, जंगल व धरती माता पर हमारा अधिकार है. सड़क के नाम पर इसे विनाश होने नहीं देंगे. 1705 ईस्वी से हमारे पूर्वज यहां रहते आ रहे हैं. इसी खेत से परिवार का पेट पलता है. लेकिन गुमला प्रशासन की लापरवाही से भारत माला सड़क का रूट बदल दिया गया. जीता टाना भगत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: VIKASH NATH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >