गुमला : जिले में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गयी हैं. इसको देखते हुए सिविल सर्जन डॉ शंभूनाथ चौधरी ने जिलेवासियों से सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचकर समुचित उपचार कराने की अपील की है. सिविल सर्जन ने बताया कि बारिश के दौरान सांप अपने बिलों से निकलकर मानव बस्तियों में पहुंच जाते हैं. ऐसे में अनजाने में सांप पर पैर पड़ने या उसके संपर्क में आने से सर्पदंश की घटनाएं हो सकती हैं. पिछले एक माह में जिले के सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के 156 मामले सामने आये हैं. हालांकि इनमें एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है.
उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है
उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा केवल उन मरीजों का है, जो उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचे. ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक पर निर्भर रहते हैं. इससे समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. सर्पदंश की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल इकाई या सदर अस्पताल पहुंचाना चाहिए.
सर्पदंश के बाद क्या करें, डॉक्टर ने दी सलाह
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. सिविल सर्जन ने कहा कि मरीज को बहुत कसकर पट्टी, बैंडेज या टूर्निकेट न बांधें. प्रभावित अंग को स्थिर रखें और मरीज को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें. उन्होंने कहा कि किसी मान्यता के बावजूद चिकित्सकीय उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए. समय पर इलाज ही सर्पदंश से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है.
