अध्यक्ष-उपाध्यक्ष व पार्षदों को पता नहीं, 1.78 करोड़ की सैरातों की हो गयी बंदोबस्ती

गुमला नगर परिषद के सैरातों की बंदोबस्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

नगर परिषद में सैरात बंदोबस्ती पर उठ रहा सवाल. दुर्जय पासवान, गुमला गुगुमला नगर परिषद के सैरातों की बंदोबस्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. नगर परिषद ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षदों को बिना सूचना दिये प्रमुख स्थलों की बंदोबस्ती कर दी. यह बंदोबस्ती 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए की गयी है और इसमें लगभग 1.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुड़ा है. अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने इस पर सवाल उठाते हुए नगर परिषद के प्रशासक को घेरा है. उनका कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को दरकिनार कर खुली डाक से बोली लगायी गयी और बाद में अखबारों के माध्यम से इसकी जानकारी मिली. इसमें बाजार टांड़, बस स्टैंड, लोहरदगा रोड, जशपुर रोड टेंपो पड़ाव, बिरसा मुंडा बाउंड्री पार्किंग स्थल, सिसई रोड और पालकोट रोड टेंपो पड़ाव शामिल हैं. स्थानीय चर्चा है कि नगर परिषद के एक अधिकारी पर एक नेता का प्रभाव है, जिसके कारण टेंडर और सैरातों की प्रक्रिया मनमर्जी से हो रही है. प्रतिनिधियों ने इसे राजस्व घोटाला बताया है और कहा है कि इस तरह की अपारदर्शी प्रक्रिया गुमला शहर के विकास पर नकारात्मक असर डाल रही है.. इन सैरातों की बंदोबस्ती हुई : गुमला शहर के ललित उरांव बस पड़ाव का 91 लाख रुपये में बंदोबस्त हुआ. : लोहरदगा रोड एवं जशपुर रोड टेंपो पड़ाव का 16 लाख में बंदोबस्त हुआ. : बिरसा मुंडा बाउंड्री के पार्किंग स्थल का सैरात 1.60 लाख रुपये में हुआ. : गुमला शहर के बाजार टांड़ का 41.98 रुपये में बंदोबस्त हुआ. : सिसई रोड ऑटो पड़ाव की बंदोबस्ती 13.40 रुपये में हुआ. : पालकोट रोड ऑटो पड़ाव की बंदोबस्त 14.49 रुपये में हुआ. गुमला शहर के विभिन्न सैरातों की बंदोबस्ती हो गयी. लेकिन मुझे पता ही नहीं चला. नगर परिषद के लोगों ने सूचना तक नहीं दी. यह गलत हो रहा है. नगर परिषद में इस प्रकार चोरी छिपे काम करने की इजाजत किसी को नहीं है. जनता के प्रति हम जवाबदेह हैं. इस तरह के निर्णय नगर परिषद की बोर्ड की बैठक में चर्चा के बाद ही होना चाहिए था. लेकिन बिना बोर्ड की बैठक के सब हो गया. शकुंतला उरांव, अध्यक्ष, नगर परिषद गुमला नगर परिषद द्वारा करीब पौने दो करोड़ रुपये की विभिन्न सैरातों की बंदोबस्ती की गयी है. लेकिन खुली डाक की किसी प्रकार की सूचना मुझे नहीं दी गयी. यहां तक कि जब मैंने पता किया तो इसकी जानकारी अध्यक्ष व वार्ड पार्षदों को भी नहीं है. यह गलत हुआ है. इसके खिलाफ नगर विकास विभाग को पत्राचार किया जायेगा. साथ ही इस डाक की जांच भी करायी जायेगी. रमेश कुमार चीनी, उपाध्यक्ष, नगर परिषद

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Published by: Vikash nath

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