गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
गुमला: सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उजागर करने वाली ‘प्रभात खबर’ की खबर का एक बार फिर बड़ा असर हुआ है. गुमला के उपायुक्त (DC) दिलेश्वर महतो ने बुधवार को रायडीह प्रखंड के अत्यंत सुदूरवर्ती कोब्जा पंचायत अंतर्गत बुचीडाड़ी गांव का जमीनी दौरा किया. डीसी ने खुद ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी सुध ली और उनकी गंभीर समस्याओं से रूबरू हुए. इस दौरान ग्रामीणों ने गांव तक पक्की सड़क, पीने का साफ पानी, आंगनबाड़ी केंद्र और बंद पड़े स्कूलों को फिर से खोलने की मांग मजबूती से रखी.
5 किलोमीटर खाट पर ढोने पड़ते हैं मरीज
दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उपायुक्त को अपनी सबसे बड़ी पीड़ा सुनाई. उन्होंने बताया कि आजादी के इतने साल बाद भी बुचीडाड़ी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है. हालात इतने बदतर हैं कि अगर गांव में कोई अचानक बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो ग्रामीणों को उन्हें खाट (चारपाई) पर लादकर 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. ‘रमजा मुख्य सड़क’ तक पहुंचने के बाद ही उन्हें एंबुलेंस नसीब हो पाती है. सड़क न होने से गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य पूरी तरह ठप है.
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वर्षों से बंद स्कूल को खोलने की गुहार
ग्रामीणों ने बुचीडाड़ी के अलावा आसपास के गांवों की समस्याओं को भी डीसी के सामने रखा. उन्होंने कहा कि गलगुटरी गांव में वर्षों से बंद पड़े सरकारी विद्यालय को पुनः संचालित किया जाए. साथ ही गलगुटरी, नवाटोली एवं अवरालोंगरा गांवों में स्वच्छ पेयजल (बोरिंग) की व्यवस्था हो और आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएं.
उपायुक्त का एक्शन प्लान: सड़क के लिए बनेगी DPR
पंचायत भवन में आयोजित जनसभा में उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने तुरंत कहा कि बुचीडाड़ी गांव तक पहुंच पथ (सड़क) के लिए जल्द ही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा. साथ ही मनरेगा के तहत पहले तात्कालिक मार्किंग कर रास्ता चलने लायक बनाया जाएगा, फिर पक्की सड़क बनेगी. इसके अलावा बुचीडाड़ी, नवाटोली, गलगुटरी एवं अवरालोंगरा गांवों में प्राथमिकता के आधार पर तुरंत बोरिंग कराकर पेयजल संकट दूर किया जाएगा.
महिलाओं को स्वरोजगार और किसानों को सिंचाई की सौगात
गुमला के उपायुक्त ने ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भी कई घोषणाएं कीं. उन्होंने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर जोहार परियोजना के तहत मुर्गीपालन, बकरी पालन और सूकर पालन का प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया. इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने के लिए भूमि संरक्षण के तहत गांवों में तालाब निर्माण और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. डीसी ने मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश दिए कि 15वें वित्त आयोग से मिली राशि का सही इस्तेमाल कर गांवों की छोटी-बड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत हल करें.
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