: तीन साल से नई कमेटी को नहीं सौंपा कार्यभार. प्रतिनिधि, गुमला गुमला प्रखंड के मुरकुंडा लैंपस वित्तीय घोटाला सामने आया है. लैंपस के सचिव पर करीब 30 लाख रुपये गबन करने, विभागीय आदेश की खुलेआम अवहेलना करने और तीन वर्षों से नई चयनित कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपने का गंभीर आरोप लगा है. इस पूरे प्रकरण को लेकर वर्तमान चयनित अध्यक्ष झाड़ी भगत और कार्यकारिणी के 10 सदस्यों ने सदर थाना पहुंचकर सचिव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने हेतु लिखित आवेदन सौंपा है. आवेदन मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. ऑडिट रिपोर्ट में लगभग 30 लाख रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई है. आरोप है कि तत्कालीन सचिव रामजन्म साहू ने विभागीय आदेश की खुलेआम अवहेलना की, नयी चयनित कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपा और सरकारी योजनाओं के तहत मिली सामग्रियों की खरीद में भी अनियमितता की. मुरकुंडा लैंपस की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी मुरकुंडा लैंपस की स्थापना वर्ष 1992 में 80 हजार रुपये की पूंजी से किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी. समय-समय पर सरकार से अनुदान मिलने से संस्था की आर्थिक स्थिति मजबूत रही. लेकिन वर्ष 2001 से 2023 तक नई कमेटी का गठन नहीं हुआ. इस दौरान सचिव को लंबे समय तक नियंत्रण मिला. 27 सितंबर 2023 को मतदान के जरिये नई कमेटी बनी और 14 दिसंबर 2023 को सहकारिता विभाग ने अध्यक्ष व कार्यकारिणी की घोषणा की. साथ ही तत्कालीन सचिव को कार्यभार हस्तांतरित करने का आदेश दिया गया, लेकिन आज तक नई कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपा गया. ऑडिट 2024-25 में सामने आया कि सचिव ने लगभग 30 लाख रुपये का गबन किया. इसके अलावा कंप्यूटर, यूपीएस, प्रिंटर, मोबाइल, पॉश मशीन और फर्नीचर की खरीद में करीब 1.67 लाख रुपये की गड़बड़ी की गयी. समिति भंग होने के बावजूद उन्होंने एक साल का 48 हजार रुपये मानदेय भी निकाल लिया. यह नियमों का खुला उल्लंघन है. प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचे अध्यक्ष झाड़ी भगत के साथ कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार साहू, जितेंद्र साहू, संतोष कुमार पुरी, विष्णु तिर्की, गंदुर खड़िया, गंदोरी देवी, फांसिका देवी, मीना देवी, मुनगी देवी और सुनीता टाना भगत शामिल थे. सभी ने सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
मुरकुंडा लैंपस में 30 लाख रुपये का गबन, जांच शुरू
गुमला प्रखंड के मुरकुंडा लैंपस वित्तीय घोटाला सामने आया है.
