दो साल से मुरकुंडा लैंपस बंद, किसानों को नहीं मिल रही खाद बीज

दो साल से मुरकुंडा लैंपस बंद, किसानों को नहीं मिल रही खाद बीज

दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला का मुरकुंडा लैंपस दो सालों से बंद है, जिस कारण किसानों को खाद बीज नहीं मिल रही. जबकि जिला सहकारिता पदाधिकारी ने लैंपस के पूर्व सचिव को लिखित निर्देश दिया है कि लैंपस का संपूर्ण अभिलेख अध्यक्ष को सौंपे, ताकि लैंपस का संचालन हो सके. परंतु, पूर्व सचिव अबतक अभिलेख दबाकर बैठे हुए हैं. बताया जा रहा है कि लाखों रुपये के घोटाला व गबन के बाद से मुरकुंडा लैंपस बंद है. जिसका असर किसानों के खेतीबारी पर पड़ रहा है. पूर्वी क्षेत्र में पड़ने वाले मुरकुंडा लैंपस से करीब पांच हजार किसान जुड़े हुए हैं. लैंपस से किसानों को लागत व अनुदानित मूल्य पर खाद बीज मिलता था. परंतु, लैंपस में हुए घोटाला व गबन के बाद बंद कर दिया गया. इस क्षेत्र के किसान दो सालों से लैंपस खोलने की मांग कर रहे हैं. यहां तक कि इसकी लिखित शिकायत अधिकारियों तक पहुंची है. परंतु, विभाग ने पूर्व सचिव को एक लिखित पत्र भेजकर चुपी साधे हुए है. बंद लैंपस को खोलने की पहल विभाग नहीं कर रहा है.

गबन मामले की पुलिस कर रही जांच

मुरकुंडा लैंपस में वित्तीय घोटाला सामने आया है. लैंपस के सचिव पर करीब 30 लाख रुपये गबन करने, विभागीय आदेश की अवहेलना करने और तीन वर्षों से नयी चयनित कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपने का आरोप लगा है. इस पूरे प्रकरण को लेकर पांच दिन पहले लैंपस के वर्तमान अध्यक्ष झाड़ी भगत और कार्यकारिणी के 10 सदस्यों ने सदर थाना में सचिव रामजन्म साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने हेतु लिखित आवेदन भी सौंपा है. आवेदन मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. उर्मी टीओपी के प्रभारी ने मुरकुंडा पहुंचकर मामले की जांच किये. कई लोगों से पूछताछ भी की है. इसके बाद भी लैंपस का ताला अबतक नहीं खुला है.

ऑडिट से लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा

मुरकुंडा लैंपस की स्थापना वर्ष 1992 में 80 हजार रुपये की पूंजी से हुई थी. इस राशि से किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराये जाते थे और मुनाफे की रकम अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त खाते में जमा होती रही है. समय-समय पर सरकार से भी अनुदान मिलता रहा. जिससे संस्था की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रही. लेकिन वर्ष 2001 से 2023 तक लैंपस में नयी कमेटी का गठन नहीं हुआ है. इस दौरान कागजी प्रक्रिया के तहत रामजन्म साहू को सर्वसम्मति से सचिव बनाया गया और वे 2018 तक इस पद पर बने रहे. इसके बाद विभागीय निर्देश पर नयी कमेटी गठन की प्रक्रिया शुरू हुई. 27 सितंबर 2023 को मतदान के जरिये नयी कमेटी का चुनाव हुआ और 14 दिसंबर 2023 को सहकारिता प्रसार पदाधिकारी द्वारा आधिकारिक पत्र जारी कर अध्यक्ष और कार्यकारिणी की घोषणा की गयी. साथ ही तत्कालीन सचिव रामजन्म साहू और बीरा खड़िया को कार्यभार हस्तांतरित करने का निर्देश भी दिया गया. लेकिन विभाग के आदेश के बावजूद आज तक नयी कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपा गया. इस बीच वर्ष 2024-25 के ऑडिट में में लैंपस की राशि का गबन का मामला सामने आया है. ऑडिटर अजीत कुमार की जांच में लगभग 30 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आयी है.

कंप्यूटर, यूपीएस सचिव के घर में है

सचिव पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत लैंपस को मिलने वाले कंप्यूटर, यूपीएस, प्रिंटर, मोबाइल, पॉश मशीन और फर्नीचर जैसी सामग्रियों में भी करीब एक लाख 67 हजार 500 रुपये की गड़बड़ी किया है. सभी खरीदी गयी सामग्री को सचिव अपने घर में रखे हुए है. वहीं, वर्ष 2023 में समिति भंग होने और नई कमेटी बनने के बावजूद उन्होंने एक साल का 48 हजार रुपये मानदेय भी निकाल लिया, जो नियमों का उल्लंघन है.

जांच चलती रहे, पर लैंपस खुल जाये

अध्यक्ष झाड़ी भगत, कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार साहू, जितेंद्र साहू, संतोष कुमार पुरी, विष्णु तिर्की, गंदुर खड़िया, गंदोरी देवी, फांसिका देवी, मीना देवी, मुनगी देवी और सुनीता टाना भगत ने कहा है कि सचिव के खिलाफ हमलोगों ने थाना में लिखित शिकायत किया है. ताकि प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई हो. इस मामले में पुलिस जांच कर रही है. परंतु, जांच होते रहेगा. इससे पहले लैंपस का ताला खुलना चाहिए. ताकि किसानों को समय पर खाद बीज मिल सके.

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By Akarsh aniket

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