गुमलाः वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर लाख (लाह) उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है. इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला की ओर से सरल परियोजना के तहत आयोजित पांच दिवसीय वैज्ञानिक लाख खेती प्रशिक्षण का समापन हुआ. 8 से 12 सितंबर तक चले प्रशिक्षण में सिसई, रायडीह और भरनो प्रखंड के किसानों एवं ग्रामीण प्रतिभागियों को लाख उत्पादन की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
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लाख उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लाख कीट के जीवन-चक्र, उपयुक्त पोषक पौधों का चयन, कीट संचयन, गुणवत्तापूर्ण ब्रूड लाख, इनोकुलेशन की सही विधि एवं समय, कीट प्रबंधन और फसल की निगरानी के बारे में जानकारी दी गई. कुसुम, बेर और पलाश जैसे प्रमुख पोषक पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया.
वैज्ञानिक पद्धति से आय का मजबूत साधन बनेगा लाख उत्पादन
समापन समारोह के मुख्य अतिथि विकास भारती बिशुनपुर के सह सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि झारखंड में लाख उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं. वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान इसे आय का मजबूत साधन बना सकते हैं. लाख उत्पादन विशेषज्ञ अटल बिहारी तिवारी ने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान मिली तकनीकी जानकारी को अपने क्षेत्रों में लागू करने और अन्य किसानों तक भी पहुंचाने की अपील की. समापन समारोह में प्रतिभागियों के बीच प्रशिक्षण उपकरण और प्रमाण-पत्र का वितरण किया गया.
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