Jharkhand Tourism: विश्व धरोहर नवरत्नगढ़ के इतिहास को जानना है, तो जरूर आइये गुमला

नये साल में कहीं घूमने-फिरने का प्लान बना रहे हैं, तो गुमला आइये. यहां आपको न सिर्फ विश्व धरोहर नवरत्नगढ़ के रूबरू होने का मौका मिलेगा, बल्कि मुगल साम्राज्य और नागवंशी राजाओं के इतिहास की जानकारी भी मिलेगी. साथ ही इस जिले में कई पिकनिक स्पॉट है, जिसका आनंद उठा सकते हैं.

वर्ल्ड हेरिटेड में शामिल है गुमला का नवरत्नगढ़

नवरत्न गढ़, जिसे डोइसागढ़ भी कहते हैं. यह विश्व धरोहर है. नववर्ष में यहां घूमने-फिरने के अलावा इतिहास जानना है, तो जरूर आइये. रांची और गुमला मार्ग पर स्थित सिसई प्रखंड में नगर गांव हैं. सिसई से पांच किमी दूर नगर गांव है. जहां नवरत्नगढ़ है. यहां मुगल साम्राज्य और नागवंशी राजाओं का इतिहास छिपा है. यह गांव अपने अंदर ऐतिहासिक धरोहर नवरत्न गढ़ को समेटे हुए है. आज इसका नाम वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है. डोइसागढ़, नवरत्न गढ़, रानी लुकई, कमल सरोवर, कपिलनाथ मंदिर, भैरव मंदिर अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व नयनाभिराम प्राकृतिक दृश्य के कारण पर्यटकों को अपनी ओर सहज तरीके से आकर्षित करता है. यह छोटानागपुर के नागवंशी राजाओं की ऐतिहासिक धरोहर है.

आज भी बचे हैं कई अवशेष

आज के इस हाईटेक युग से हजारों वर्ष पुरानी कहानी है. डोइसागढ़ जो आज नगर गांव के नाम से जाना जाता है. कभी यहां किलकारियां गूंजा करती थी. यहां के लोगों का पहनावा, बोलचाल, खानपान वर्तमान परिवेश से एकदम भिन्न था. परंतु आज यहां विरानी है. गजब की खमौसी है. नागवंशी राजाओं द्वारा बनाये गये अमूल्य भवन खंडहर में तब्दील हो गये हैं. हालांकि, अब पुरातत्व विभाग इस इतिहास को बचाने में लगा हुआ है. खंडहर भवनों की मरम्मत की जा रही है. इतिहास के अनुसार मुगल साम्राज्य से बचने के लिए राजा दुर्जनशाल ने इसे बनवाया था. नवरत्न गढ़ के चारों तरफ खाई था और यहां घुसने का एक मात्रा पहाड़ी रास्ता हुआ करता था. इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से राजा दुर्जनशाल ने नवरत्नगढ़ को अपनी राजधानी बनाया था. लेकिन, कलांतार में समय बदला. कई भवन जमींदोज हो गये. कुछ भवन अभी भी शेष हैं. खाई समय के साथ खत्म हो गया और वह समतल जमीन का रूप ले लिया है. यह ऐतिहासिक स्थल नववर्ष में घूमने का बहुत ही अच्छा स्थान है.

डोइसागढ़ में क्या देंखे

डोइसागढ़ व नवरत्न गढ़ के नयनाभिराम प्राकृतिक दृश्य, पांच मंजिला वर्गाकार इमारत, 33 इंच मोटी दीवार, रानी वास, कचहरी घर, कमल सरोवर, रानी लुकईयर का भुलभुलैया, गुप्त कमरा, गुबंद का भीतरी भाग में पशु चित्र, घोड़ा, सिंहों से उत्कीर्ण परिपूर्ण आकृति, चारों कोनों पर शीर्ष गुबंदनुमा स्तंभों पर बड़े बड़े नाग लिपटे, जगन्नाथ मंदिर, भैरव मंदिर, कपिलनाथ मंदिर, मंदिर के गर्भगृह में बड़े आकार की मूर्ति, धोबी मठ, दीवारों पर मनोहारी चित्रकारी.

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रिपोर्ट : दुर्जय पासवान, गुमला.

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लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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