नक्सल प्रभावित गुमला के हुटाप गांव में महीनों से चल रहा ईंंट भट्ठा, हादसे के बाद प्रशासन की खुली नींद

नक्सल प्रभावित गुमला जिला के हुटाप गांव में महीनों से अवैध ईंट भट्ठा चल रहा है. इसके बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं किया. ईंट भट्ठा के दीवार गिरने से नाबालिग सहित तीन मजदूरों की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली. अब प्रशासन जांच में जुटी है.

Jharkhand News: गुमला जिला के डुमरी प्रखंड के घोर नक्सल प्रभावित हुटाप गांव में महीनों से अवैध ईंट भट्ठे चल रहा है. प्रखंड प्रशासन को इसकी जानकारी है. इसके बाद भी प्रशासन ने कार्रवाई नहीं किया. नतीजा, ईंट भट्ठे की दीवार गिरने से हादसे में तीन बेकसूर गरीब मजदूरों की जान चली गयी. हालांकि, इस हादसे के बाद प्रशासन जागा और अब जांच शुरू किया है. लेकिन, हादसे के दो दिन के बाद भी अबतक थाने में किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी. यहां तक कि जिम्मेदार अधिकारी हादसे के संबंध में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं.

हादसे के बाद रेस हुए अधिकारी

ईंट भट्ठा का दीवार गिरने से तीन मजदूरों की खबर छपने के बाद गुरुवार को चैनपुर एसडीओ प्रीति किस्कू, बीडीओ एकता वर्मा, सीओ शिवपूजन तिवारी, मुखिया डेविड मिंज, सर्किल इंस्पेक्टर बैजू उरांव, थाना प्रभारी मनीष कुमार दल बल के साथ गांव पहुंचे. सभी लोगों ने मृतक पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटना के बारे में विस्तृत जानकारी लिया. साथ ही पीड़ित परिवार को सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं का लाभ दिलाने का वादा किया गया.

चार बच्चों के सिर से उठा मां का साया

मृतका अनिता देवी के पति रमेश नागेसिया ने कहा कि हमलोग गरीब परिवार से हैं. मेरे चार छोटे-छोटे बच्चे हैं. पति-पत्नी दोनों अदली-बदली करके ईंट भट्ठा में काम करने जाते थे. जिससे हमारे घर का चूल्हा जलता था. अब पत्नी की मौत से बच्चों की परवरिश की समस्या उत्पन्न हो गयी है. उन्होंने प्रशासन से सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग किया है.

प्रशासन मुझे रोजगार उपलब्ध कराये : रजनी

मृतक विजय मुंडा की पत्नी रजनी देवी ने कहा कि मेरे पति एकमात्र कमाऊ व्यक्ति थे जो सीताराम के ईंट भट्ठा में काम करने गये थे. दीवार गिरने से दबकर घायल हो गया और इलाज के लिए ले जाने के क्रम में उनकी मौत हो गयी. हमारा गरीब परिवार है. मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं. मुझे परिवार पलने के लिए रोजगार चाहिए. साथ ही बच्चों के पढ़ाई लिखाई के साथ परिवार को आर्थिक मदद चाहिए.

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बेटी की मौत से जीने का सहारा छिना : मां

मृतका नाबालिग हीरामुनी कुमारी (14 वर्ष) की मां चिट्टू मुंडाइन ने रुआंसी आवाज में कहा कि बेटी हमारी भंडार कुल्लू गांव की स्कूल में 8वीं क्लास में पढ़ती थी. उसके बाद ईंट भटठा में काम करने जाती थी. हमें कुछ नहीं चाहिए. बस सरकार से कुछ मुआवजा मिल जाये. क्योंकि बेटी के सहारे घर की जीविका चलता था. पढ़ाई के साथ मेरी बेटी मजदूरी कर पैसा कमाती थी. अब मेरे जीने का सहारा ही छिन गया.

नाबालिग को काम कराना अपराध है

हादसे में एक नाबालिग लड़की की भी जान चली गयी. नाबालिग की मौत से कई सवाल खड़े हो गये. किसके कहने पर नाबालिग को काम पर रखा गया. साथ ही नाबालिग काम कर रही है. इसकी जानकारी प्रशासन को थी या नहीं. प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर भी सवाल खड़ा हो रहा है.

घटना का नजारा घायल की जुबानी

घायल रेहना देवी ने बताया कि हमलोग ईंट हटाने का काम कर रहे थे कि अचानक से दीवार भरभरा कर गिर पड़ा. हमें बचने का मौका ही नहीं मिला. जहां ईंट से तीन लोग दब गये. निकलने का बाद उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया. जहां रास्ते में ही तीनों की मौत हो गयी. मेरे चेहरे और दाहिने हाथ में चोट लगी है. महुआडाड़ इलाज के लिए गये थे. लोहरदगा के रहने वाले हैं. यहां सपरिवार रहकर भट्ठा में काम करते हैं.

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भट्ठा मालिक की लापरवाही से हादसा

मुखिया डेविड मिंज ने कहा कि सीताराम प्रसाद के ईंट भट्ठा में पंचायत के मजदूर काम कर रहे थे. भट्ठा मालिक और मुंशी की लापरवाही से दीवार गिर गया. जिस कारण काम कर रहे तीन मजदूरों की मौत हो गयी. जिसमें एक (14 वर्ष) नाबालिग लड़की भी है. मुखिया ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता की मांग की है. साथ ही भट्ठा मालिक से पीड़ित परिवार और उनके छोटे छोटे बच्चों के भरण पोषण के लिए आर्थिक मदद करे.

रिपोर्ट : प्रेमप्रकाश भगत, डुमरी, गुमला.

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By Samir Ranjan

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