आधुनिकता के चंगुल में होली पर्व फंस गया है : राजेंद्र

आधुनिकता के चंगुल में होली पर्व फंस गया है : राजेंद्र

गुमला. पूर्व वार्ड पार्षद 70 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि आज से 30 साल पहले होली का मतलब सभी जाति, धर्म हर उम्र के लोगों का मिलना जुलना होता था. पहले होली में आदर व सम्मान देखने को मिलता था. परंतु, बदलते समय के साथ आधुनिकता के चंगुल में होली पर्व फंस गया है. इसलिए समय के साथ होली पर्व खेलने की परंपरा भी बदल गयी है. पहले होली एक सप्ताह तक खेली जाती थी. परंतु, अब जिस दिन होली है. उसी दिन लोग होली खेलने निकलते हैं. अबीर खेलने की परंपरा भी खत्म हो रही है. दक्षिणी छोटानागपुर के गुमला जिले में होली पर्व का एक अलग उत्साह व उमंग होता था. गाजा, बाजा, ताल, झाल के साथ लोग खूब नाचते गाते थे. पुराने कवि होली में एक से बढ़कर एक गीत गाते थे. परंतु, बदलते समय के साथ होली की कई परंपरा विलुप्त होने लगी है. यह चिंता की बात है. इसपर मंथन करने की जरूरत है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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