गुमला साहित्य महोत्सव में साहित्यकारों का समागम, हेमंत सोरेन ने भेजा ये संदेश

Gumla Literature Festival: गुमला जिले में 3 दिवसीय गुमला साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गाय है. इसमें देश के अलग-अलग हिस्से से साहित्यकारों ने हिस्सा लिया.

Gumla Literature Festival | गुमला, दुर्जय पासवान : झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद एवं कोल इंडिया लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में गुमला जिला प्रशासन ने द्वितीय गुमला साहित्य महोत्सव का आयोजन किया. द्वितीय गुमला साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के स्वागत संबोधन से हुआ. उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संदेश को पढ़ा. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में गुमला की समृद्ध साहित्यिक परंपरा की सराहना करते हुए जिले में संचालित सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय और अन्य पुस्तकालयों के माध्यम से पठन-पाठन संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि इस महोत्सव से न केवल साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी.

गुमला साहित्य महोत्सव में आये अतिथियों को स्थानीय वाद्य यंत्र मांदर भेंट किया गया. फोटो : प्रभात खबर

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए अतिथियों ने किया पौधरोपण

कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों पौधरोपण किया. इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था. इसके बाद साहित्य जगत के प्रसिद्ध लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये. विक्रम ग्रीवाल, अक्षय बहिबालाजी, डॉ नारायण उरांव, यदुवंश प्रणय, जसिंता केरकेट्टा, चंद्रहास चौधरी, अनुकृति उपाध्याय, अनुज लुगून, महेश्वर सोरेन, डॉ प्रेम चंद्र उरांव, संजीव कुमार मुर्मू और शताब्दी मिश्रा ने गुमला साहित्य महोत्सव की शोभा बढ़ायी.

हजारों साहित्यप्रेमियों ने आयोजन को बनाया भव्य

हजारों नागरिकों एवं साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य बना दिया. जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, आईटीडीए परियोजना निदेशक, एसडीओ सदर, एसडीओ चैनपुर, एसडीओ बसिया, एलआरडीसी गुमला सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों एवं उनके परिवार के सदस्य भी गुमला लिट फेस्ट में शामिल हुए.

गुमला लिटरेचर फेस्ट में शामिल लोग. फोटो : प्रभात खबर

स्थानीय संगीत और खानपान का अतिथियों ने उठाया लुत्फ

कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों का पारंपरिक झारखंडी संस्कृति के अनुरूप स्वागत किया गया. उन्हें पंची एवं साफा पहनाया गया. स्थानीय संगीत और खानपान का भी देश के अलग-अलग हिस्से से आये साहित्यकारों ने लुत्फ उठाया.

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By Mithilesh Jha

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