गुमला: शहर में मजदूरों के लिए पानी, शौचालय और छांव की व्यवस्था नहीं, सड़क किनारे खड़े रहने को मजबूर

Gumla News: गुमला शहर में मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है. शहर में दैनिक मजदूरों के लिए न ही बैठने और आराम करने की व्यवस्था है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट 

Gumla News: यह कैसी व्यवस्था है. आज मजदूर दिवस है, लेकिन गुमला शहर में मजदूरों के बैठने, आराम करने की कोई सुविधा नहीं. हालांकि, अस्थायी रूप से पालकोट रोड स्टेट बैंक के पास लेबर चौक है. लेकिन यहां मजदूरों के लिए पानी, शौचालय और छांव की व्यवस्था नहीं है. जिस कारण मजदूर सुबह साढ़े आठ बजे से 10 बजे तक, जबतक काम नहीं मिल जाता सड़क के किनारे खड़े रहते हैं. यहां महिला, पुरुष, युवक युवती सभी तरह के मजदूर रहते हैं. इस दौरान अगर किसी को बाथरूम लग जाये. तो इनके लिए यहां यूरीनल तक की व्यवस्था नहीं है जो कि गुमला प्रशासन के काम पर सवाल खड़ा करता है. साथ ही स्थानीय नेताओं के चुनावी वादों की पोल खोलता है.

नहीं बन पाया भवन

गुमला शहर के बाजार टाड़ में मजदूरों के आश्रय व आराम के लिए आश्रयगृह बनने वाला था. इसके लिए लेआउट होने के बाद भवन बनाने के लिए नींव भी खोदना शुरू हो गया था. लेकिन गुमला विधायक ने यहां मजदूर आश्रयगृह बनाने का विरोध किया. जिसका नतीजा है. यहां मजदूरों के लिए आश्रयगृह नहीं बन सका. जिस कारण आज भी मजदूरों को पालकोट रोड में सड़क के किनारे धूप, छांव या बारिश में खड़ा रहना पड़ता है. अगर बाजार टाड़ के एक कोने में आश्रयगृह बन जाता तो आज मजदूरों को कई तरह की सुविधा मिलती. 

रसोइया संघ की अध्यक्ष ने क्या कहा? 

रसोइया संघ की अध्यक्ष देवकी देवी ने कहा कि गुमला में मजदूरों के लिए बैठने और आराम करने की जगह नहीं होना वाकई गंभीर समस्या है. दिन भर धूप-बारिश में काम करने के बाद एक छांव भी न मिले तो मजबूरी है. मैं लंबे समय से मजदूरों के लिए स्थायी लेबर चौक की मांग कर रही हूं. यहां तक की अभी पालकोट रोड में जहां अस्थायी लेबर चौक है वहां भी सुविधा की मांग की हूं. लेकिन यहां किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है.

नगर परिषद अध्यक्ष ने क्या कहा? 

इस मामले पर नगर परिषद अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा कि गुमला शहर के अंदर मजदूरों को सुविधा मिले. इसके लिए प्रयास करेंगे. कोई ऐसा स्थान का चयन किया जाएगा. जहां मजदूर आराम कर सके. जबतक काम नहीं मिले आश्रय ले सके. क्योंकि, गुमला शहर में दूर दूर से मजदूर आते हैं. लेकिन मजदूरों के लिए शहर में किसी प्रकार की सुविधा नहीं होना चिंता की बात है. नगर परिषद समस्या दूर करने का प्रयास करेगा. 

आजसू जिला अध्यक्ष ने क्या कहा? 

दिलीपनाथ साहू, जिला अध्यक्ष, आजसू ने कहा कि हर बड़े चौक पर ‘मजदूर विश्राम स्थल’ बने. उसमें टीन शेड, सीमेंटेड चबूतरा, पीने का पानी, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट हो. साथ ही गुमला में जो रैन बसेरा है. दिन में उन्हें मजदूरों के आराम के लिए खोल दिया जाये. गुमला में जो कंपनियां/बैंक हैं. उनसे सीएसआर के तहत 2-3 ‘लेबर शेल्टर’ बनवाए जाए. गुमला में हर दिन सैकड़ों दैनिक मजदूर आते हैं. उन्हें सुविधा मिले. 

दो प्रमुख समस्या 

चौक-चौराहे : बस स्टैंड, टावर चौक, जशपुर रोड, पालकोट रोड पर सुबह से मजदूर काम के इंतजार में खड़े रहते हैं. बैठने को बेंच नहीं. धूप-बारिश से बचने को शेड नहीं है.

मजदूर अड्डे : गुमला में कोई तय लेबर चौक नहीं जहां पानी, शौचालय, छांव की व्यवस्था हो. हालांकि अस्थायी रूप से पालकोट रोड में मजदूर खड़े रहते हैं पर यहां सुविधा नहीं.

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लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर में लाइफस्टाइल बीट के लिए कंटेंट लिखती हैं. वह पिछले एक साल से व्यंजन (Recipes), फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे विषयों पर लेख लिख रही हैं. उनका उद्देश्य पाठकों को रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और स्टाइलिश बनाने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स देना है.

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