जन्माष्टमी पर घर से लापता हुई 7 साल की बच्ची, खेत के कुएं में मिला शव; गांव में मातम

गुमला के पालकोट में लापता सात वर्षीय बच्ची का शव खेत के कुएं से बरामद हुआ. पुलिस मामले की जांच कर रही है, घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल है.

गुमला: पालकोट थाना क्षेत्र के एक गांव में शनिवार को खेत के कुएं से सात वर्षीय बच्ची का शव मिलने से सनसनी फैल गयी. बच्ची पिछले तीन वर्षों से अपनी बुआ के घर रहकर कक्षा तीन में पढ़ाई कर रही थी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

बुआ के घर रहकर पढ़ती थी बच्ची

बच्ची की बुआ ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं और कोई बेटी नहीं थी. इसलिए वह बच्ची को अपने साथ ले आयी थीं. वह उसे अपनी बेटी की तरह रखती थीं और पिछले तीन वर्षों से वह उनके घर रहकर पढ़ाई कर रही थी.

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शुक्रवार को घर से हुई लापता

बुआ के अनुसार, शुक्रवार को जन्माष्टमी की छुट्टी थी. सुबह उन्होंने बच्ची के साथ नाश्ता किया था. इसके बाद वह अपने पति के साथ खेत में घास निकालने चली गयीं और बच्ची को घर पर ही रहने के लिए कहा था. दोपहर करीब 12 बजे जब वह घर लौटीं, तो बच्ची वहां नहीं मिली.

शाम तक नहीं लौटी तो शुरू की तलाश

शुरुआत में परिजनों को लगा कि बच्ची आसपास खेलने गयी होगी. लेकिन शाम तक उसके वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की. रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की गयी, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला. बाद में परिजनों को खेत के कुएं के पास बच्ची की चप्पल दिखाई दी. इसके बाद कुएं में तलाश की गयी, तो बच्ची का शव बरामद हुआ. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.

परिवार और गांव में पसरा मातम

सात वर्षीय बच्ची की अचानक मौत से परिवार में मातम पसरा है. घटना के बाद पूरे गांव में भी शोक का माहौल है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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