80 साल बाद भी विकास से दूर बेहरापाठ, पानी-सड़क-बिजली के लिए तरस रहे 20 परिवार

गुमला के बेहरापाठ गांव में 20 परिवार सड़क, बिजली और पानी के लिए तरस रहे हैं. मरीज को छह किमी दूर बहंगी में ले जाने को ग्रामीण मजबूर हैं. जानें पूरी रिपोर्ट.

जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट

गुमलाः सरकार गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन रायडीह प्रखंड की ऊपर खटंगा पंचायत के बेहरापाठ गांव की तस्वीर इन दावों से अलग है. गांव के करीब 20 परिवार आज भी सड़क, बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी उनका गांव विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ सका है.

गर्मी में सूख जाता है झरना, गड्ढे का पानी पीते हैं ग्रामीण

बेहरापाठ के ग्रामीणों के लिए पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. गांव में पानी का एकमात्र प्रमुख स्रोत झरना है. गर्मी बढ़ने के साथ झरना सूख जाता है. इसके बाद ग्रामीण आसपास के गड्ढों में जमा पानी का इस्तेमाल पीने के लिए करने को मजबूर होते हैं. दूषित पानी के कारण बीमारियों का खतरा भी बना रहता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव में डीप बोरिंग कराने और जलमीनार का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि सालभर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके.

सड़क नहीं, छह किमी तक बहंगी में मरीज ढोने की मजबूरी

गांव में सड़क की स्थिति बेहद खराब है. ग्रामीणों के अनुसार, मुख्य सड़क की हालत ऐसी है कि एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति में मरीज को बहंगी में बैठाकर करीब छह किलोमीटर दूर सोकराहातु की मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.

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खराब और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर मरीज को बहंगी से ले जाना ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल होता है. कई बार रास्ते में मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा भी बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बन जाने से स्वास्थ्य सुविधा के साथ-साथ गांव की अन्य समस्याओं का समाधान भी आसान हो जाएगा.

समस्या बताती महिलाएं

सोलर प्लांट खराब, ढिबरी की रोशनी में पढ़ते हैं बच्चे

बेहरापाठ में वर्षों से बिजली की सुविधा नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले प्रदान संस्था की ओर से गांव में सोलर प्लांट लगाया गया था, लेकिन देख-रेख के अभाव में वह भी खराब हो गया. इसके बाद रात में पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है. बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है. उन्हें रात में ढिबरी की रोशनी में पढ़ना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई के साथ घरेलू और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं.

जानकारी देते हुए गांव के ग्रामीण

सड़क, बिजली और पानी की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में पक्की सड़क बनाने, बिजली की सुविधा बहाल करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाएगा.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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