खराब ग्राफ्टेड टमाटर पौधों ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी

कामडारा के किसानों को नर्सरी से मिले सड़े-गले ग्राफ्टेड टमाटर के पौधे, लाखों की पूंजी डूबी। प्रबंधन की लापरवाही से किसान परेशान और आक्रोशित।

कामडारा. दीप रूट फॉर्म्स (हंसा, मुरहू) की कथित लापरवाही से कामडारा प्रखंड के किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. खराब और सड़े-गले ग्राफ्टेड टमाटर के पौधे मिलने से किसान अपनी मेहनत और जमापूंजी गंवाकर मायूस हैं. किसानों ने नर्सरी प्रबंधन पर घटिया पौधे उपलब्ध कराने और शिकायत के बावजूद मामले में संज्ञान नहीं लेने का आरोप लगाया है.

पौधों की डिलीवरी की उम्मीद में लाख रुपये हुए खर्च

पूरा मामला रायबा गांव के किसान प्रेमजीत सिंह से जुड़ा है. उन्होंने बीते 10 जून को नर्सरी से 10 रुपये प्रति पौधे की दर से 4500 ग्राफ्टेड टमाटर के पौधों की एडवांस बुकिंग करायी थी. पौधों की डिलीवरी 30 जून को होनी तय थी. पौधों की डिलीवरी की उम्मीद में किसान ने अपने खेत में ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग की पूरी तैयारी करायी, जिस पर करीब एक लाख रुपये खर्च हुए. नियत तिथि पर पौधे लेने के लिए प्रेमजीत सिंह तीन से चार बार पिकअप वाहन लेकर नर्सरी पहुंचे, लेकिन उन्हें पौधे उपलब्ध नहीं कराये गये.

पौधों की खराब गुणवत्ता के कारण पूंजी हुई बर्बाद

करीब एक सप्ताह पूर्व आखिरकार उन्हें 4500 पौधे दिये गये. किसान के अनुसार, नर्सरी से मिले सभी पौधे सड़े-गले और खराब थे. खेत में लगाने से पहले ही पौधे पीले पड़कर नष्ट हो गये. किसान का आरोप है कि पौधों की खराब गुणवत्ता के कारण उनकी पूरी तैयारी और पूंजी बर्बाद हो गयी. समय पर पौधे नहीं मिलने से खेती का चक्र भी प्रभावित हुआ, जिससे नुकसान और बढ़ गया.

बेहतर उत्पादन की उम्मीद में पौधों की खरीद की

इस तरह किसान जोलेन बारला, पवन सिंह, एडविन डुंगडुंग, प्रदीप और दसरू सिंह ने भी नर्सरी से मिले घटिया पौधों के कारण नुकसान होने की बात कही है. किसानों का कहना है कि उन्होंने बेहतर उत्पादन की उम्मीद में पौधों की खरीद की थी, लेकिन खराब पौधे मिलने से उनकी मेहनत और निवेश दोनों बर्बाद हो गये. पीड़ित किसानों ने बताया कि जब उन्होंने नर्सरी प्रबंधन से संपर्क कर अपनी समस्या बतायी, तो उनकी शिकायत पर कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया गया. इससे किसानों में आक्रोश है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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