गुमला के इन 5 शिवधामों का रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान, कहीं 52 भुजाओं वाले महादेव तो कहीं सैकड़ों शिवलिंग

गुमला के कपिलनाथ, कमलपुर और महादेव कोना जैसे प्राचीन शिव मंदिरों में सावन के दौरान जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है.

गुमला. गुमला में कई प्राचीन शिवमंदिर व शिवलिंग है जो आस्था व भक्ति का केंद्र है. पूरे सावन माह इन शिवालयों में भक्तों की भीड़ रहती है. इन्हीं में कपिलनाथ, कमलपुर व महादेव कोना में प्राचीन शिव मंदिर है. जहां सावन माह में लोग दूर दूर से जल चढ़ाने पहुंच रहे हैं.

सिसई : कपिलनाथ शिव मंदिर प्राचीन है

संवत 1739 में राम साह व रघुनाथ साह द्वारा निर्मित नगर नवरत्नगढ़ के ऐतिहासिक प्राचीन कपिलनाथ शिव मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में अनन्त आस्था है. वैसे तो इस मंदिर में सालों भर श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं. पर सावन माह में श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है. वहीं पोटरो स्थिति बूढ़ा महादेव व मुरगू गांव स्थिति चिरैयाधाम में भी श्रद्धालुओं का अटूट आस्था है. यहां शिव पर जलाभिषेक के लिए सावन में श्रद्धालू पहुंचते हैं.

भरनो : कमलपुर मंदिर में उमड़ेंगे श्रद्धालू

भरनो प्रखंड के कमलपुर गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया है. यहां आकर पूजा अर्चना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. प्रखंड के लोग पूरे वर्ष यहां पूजा अर्चना करने आते हैं. परंतु, सावन के महीने में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों का तांता लगा रहता है. चौथी सोमवारी को लेकर यहां विधि व्यवस्था अच्छी है.

रायडीह : महा सदाशिव मंदिर से आस्था है

रायडीह प्रखंड के मरदा गांव स्थित महा सदाशिव मंदिर पूरे जिले में आस्था का एक प्रतीक बना हुआ है. यहां शिव की 52 भुजा धारी प्रतिमा है जो काफी मन मोहक है. साथ ही पूरा मंदिर परिसर रंग बिरंगे फूलों से पटा हुआ है. यह दोनों शिवालय सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सुरक्षित है. चौथी सोमवारी को लेकर समिति के लोगों ने पूरी तैयारी की है.

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बसिया : महादेव कोना में सैंकड़ों शिवलिंग

बसिया प्रखंड के प्रसिद्ध महादेव कोना शिव मंदिर काफी प्रसिद्ध मंदिर है. बुजुर्गों की माने तो शिव लिंग का निर्माण विश्वकर्मा भगवान द्वारा निर्मित है. यहां मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों में बनाये गये आकृति देखा जा सकता है. यहां सैंकड़ों शिवलिंग है. मंदिर चारों ओर पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है, जो काफी रमणीय है. यह मंदिर रांची सिमडेगा सड़क से एक किमी दूरी पर है. यह मंदिर आस्था का केंद्र है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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