आजादी के 78 साल बाद भी 450 परिवार अंधेरे में, पोल-तार लगी लेकिन नहीं पहुंची बिजली

गुमला के ऊपर खटंगा पंचायत में 7 साल से बिजली का इंतजार कर रहे 450 परिवार। पोल और तार लगने के बाद भी ग्रामीण ढिबरी के सहारे जीवन जीने को मजबूर हैं।

गुमला. आजादी के 78 साल बाद भी रायडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती ऊपर खटंगा पंचायत के करीब 450 परिवार बिजली की सुविधा से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लगभग सात वर्ष पहले गांव में बिजली के पोल और तार लगा दिये गये, लेकिन अब तक विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.

बिजली के इंतजार में ग्रामीण आज भी ढिबरी के सहारे जीवन गुजार रहे हैं. मिशन बदलाव की ओड़िशा राज्य संयोजक अंजना टोप्पो के नेतृत्व में टीम ने ऊपर खटंगा पंचायत का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं. ग्रामीणों के अनुसार नीच खटंगा, डहपाटोली, चिरगांव, कोबीटोली और लालमाटी समेत छह गांवों के लगभग 450 परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं.

उनका आरोप है कि बिजली कनेक्शन के नाम पर 4,400 रुपये की राशि मांगी जा रही है, जिसे गरीब परिवार देने में सक्षम नहीं हैं. बिजली समस्या को लेकर ग्रामीणों ने गांव में बैठक भी की, जिसमें 200 से अधिक लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं. ग्रामीणों ने मिशन बदलाव को लिखित आवेदन सौंपकर शीघ्र बिजली उपलब्ध कराने की मांग की.

अंजना टोप्पो ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले विधायक द्वारा बिजली बहाल कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण कई बार विधायक से मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें हर बार जल्द समस्या दूर करने का भरोसा दिया गया.

उन्होंने विधायक और सांसद से सवाल करते हुए कहा कि जब गांव में पोल और तार लग चुके हैं, तो बिजली क्यों नहीं पहुंची. मिशन बदलाव की सोनामति कुमारी और अंजना टोप्पो ने पूरे मामले की जांच कराने, ग्रामीणों को शीघ्र बिजली उपलब्ध कराने तथा कनेक्शन के नाम पर गरीब परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डालने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब गांवों में आज भी ढिबरी जल रही हो, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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