गुमला : करौंदाबेड़ा में शहीद मेला 2 सितंबर को, 25 साल पहले दो पुरोहित व एक ब्रदर की हुई थी हत्या

जगरनाथ, गुमला पालकोट ब्लॉक के करौंदाबेड़ा चर्च में दो सितंबर 1994 ईस्वी को फादर लौरेंस कुजूर, फादर जोसेफ डुंगडुंग व ब्रदर अमर अनूप इंदवार शहीद हुए थे. दो सितंबर की घटना छोटानागपुर के इतिहास में दर्ज है. आज भी उस घटना को याद कर इसाई मिशनरी सिहर जाते हैं. घर छोड़ मानव सेवा के लिए […]

जगरनाथ, गुमला

पालकोट ब्लॉक के करौंदाबेड़ा चर्च में दो सितंबर 1994 ईस्वी को फादर लौरेंस कुजूर, फादर जोसेफ डुंगडुंग व ब्रदर अमर अनूप इंदवार शहीद हुए थे. दो सितंबर की घटना छोटानागपुर के इतिहास में दर्ज है. आज भी उस घटना को याद कर इसाई मिशनरी सिहर जाते हैं. घर छोड़ मानव सेवा के लिए समर्पित दो पुरोहित व एक ब्रदर की निर्मम हत्या कर दी गयी थी.

फादर लौरेंस कुजूर, फादर जोसेफ डुंगडुंग व ब्रदर अमर अनूप इंदवार जो करौंदाबेड़ा पल्ली में रहकर दीन दुखियों की सेवा में लगे हुए थे. दो सितंबर की अर्धरात्रि को असामाजिक तत्वों ने इनकी निर्मम हत्या कर दी थी. उस घटना के 25 वर्ष गुजर गये. लेकिन आज भी सभी के दिलोंदिमाग में दो सितंबर की घटना ताजा है.

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी करौंदाबेड़ा में शहीद मेला सह श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जायेगा. मेला में लगभग 50 हजार इसाई मिशनरियों के शिरकत करने की उम्मीद हैं, जो शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

शहीदों का समाधि स्थल आज भी करौंदाबेड़ा पल्ली परिसर में है. तीनों शहीदों का समाधि स्थल एक ही स्थान पर है. यह पवित्र स्थल भी माना जाता है. यहां मिशनरी पूरी श्रद्धा के साथ भाग लेते है.

शहीदों का खून बेकार नहीं गया : फादर सीप्रियन

गुमला के विकर जनरल फादर सीप्रियन कुल्लू ने बताया कि दो सितंबर की अर्धरात्रि छोटानागपुर के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना घटी थी. गुमला जिला के करौंदाबेड़ा पल्ली में सेवा के लिए समर्पित दो पुरोहित व एक ब्रदर की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी. परंतु उनका खून बेकार नहीं गया. उनका खून धर्म का बीज बन गया. जो धीरे-धीरे अंकुरित होते हुए एक विशाल पेड़ बन गया और इस पेड़ की छांव में गुमला धर्मप्रांत के लाखों ख्रीस्त विश्वासी जीवन यापन कर रहे हैं. करौंदाबेड़ा आज के दिन में कोई अनजान गांव नहीं है. इसकी ख्याति पूरे विश्व में है.

सात धर्मप्रांत के मिशनरी भाग लेंगे

शहीदों की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शहीद मेला में गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा, जशपुर, लोहरदगा, जमशेदपुर, हजारीबाग, राउरकेला धर्मप्रांत से लगभग 50 हजार इसाई मिशनरी भाग लेंगे. मेला व मिस्सा पूजा की पूरी तैयारी हो गयी है. शहीद मेला दिन के 9.30 बजे से शुरू होगी. इसकी शुरूआत तीर्थयात्र व सामूहिक जुलूस से होगा. जुलूस पालकोट व बघिमा रूट से निकलेगा.

इसके मुख्य अतिथि गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप पॉल लकड़ा होंगे. इनके अलावा मिस्सा पूजा में लगभग 200 पुरोहित, 100 धर्मबहनें शिरकत करेंगे. दिन के 10.30 बजे शहीदों के समाधिस्थल पर दीप प्रज्वलन व झंडोत्तोलन किया जायेगा. समारोही पावन मिस्सा 11.00 बजे से शुरू होगी.

नशापान से दूर रहने की अपील

फादर सीप्रियन कुल्लू ने लोगों से नशापान से दूर रहने की अपील की है. खासकर युवाओं व वैसे पुरुषों को जो हड़िया व दारू पीकर वाहन चलाते हैं. उन्होंने कहा कि बीते साल मेला से लौट रहे कुछ लोग सड़क हादसे में मर गये थे. यह हमारे समाज के लिए क्षति है. इसलिए मैं समाज के सभी लोगों से अपील करता हूं कि मेला में जो भी लोग भाग लें, वे हड़िया व दारू का सेवन न करें. नशापान कर वाहन चलाने के बाद हादसे होते हैं. इससे घायल होने के अलावा जान भी जाती है.

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