दुर्जय पासवान
गुमला : पालकोट प्रखंड के लव कुमार सिंह उर्फ सुदामा (10 वर्ष) व बली उरांव (07 वर्ष) को उसके पिता ने ही ठुकरा दिया है. दोनों मासूम पिता के रहते अनाथों की तरह जी रहे हैं. आज भी ये बच्चे अपने पिता को याद कर रो पड़ते हैं. लेकिन डेढ़ साल से इन दोनों मासूमों को उनके पिता हालचाल जानने का प्रयास नहीं किया. अभी ये दोनों मासूम गुमला शहर के खुशमारना बालगृह लुथेरान में पल रहे हैं. सीडब्ल्यूसी इन बच्चों का देखरेख कर रहा है.
बालगृह के सदस्यों के अनुसार ये दोनों बच्चे अपने पिता व परिवार के सदस्यों से मिलना चाहते हैं. लेकिन कोई मिलने नहीं आता है. पिता की याद आने पर ये बच्चे रोने भी लगते हैं. जब ये दोनों बच्चे रोते हैं तो बालगृह के अन्य बच्चे इन दोनों को खूब हंसाते हैं. जिससे इनका दुख कम हो सके.
बालगृह के केस इंचार्ज पवन लकड़ा ने बताया कि डेढ़ साल से ये दोनों बच्चे बालगृह में है. सृजन फाउंडेशन इन दोनों बच्चों को अलग-अलग स्थानों से लाकर सीडब्ल्यूसी को सौंपा था. इसके बाद सीडब्ल्यूसी इन बच्चों को हमारे बालगृह में देखभाल के लिए छोड़ दिया है. हमलोग आज भी इन दोनों बच्चों के परिवार का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन इनके परिवार के सदस्य इन बच्चों से मिलने नहीं आते है. न ही कभी कोई सूचना भेजवाया है.
लव कुमार सिंह की कहानी
बालगृह के केस इंचार्ज पवन लकड़ा ने बताया कि लव कुमार सिंह की उम्र 10 वर्ष है. इसका एक नाम सुदामा भी है. घर पालकोट प्रखंड के काली मंदिर के समीप है. लव ने अपने साथ घटित घटनाओं की जानकारी सीडब्ल्यूसी व बालगृह को दी है. बालगृह के अनुसार लव के पिता का नाम डोमरा नगेशिया है. लव की मां गांगी देवी का निधन हो गया है. इसके बाद डोमरा ने दूसरी शादी कर ली. मां के निधन के बाद अक्सर लव को उसके पिता अपना बेटा मानने से इंकार कर रहा है.
अक्सर वह लव को पीटता है. पिता की पिटाई की डर से लव पालकोट के एक गुफा में छिपकर रहता था. कुछ लोगों ने इसकी जानकारी सृजन फाउंडेशन को दी. सृजन फाउंडेशन ने लव को 10 मार्च 2018 को अपने संरक्षण में लेकर सीडब्ल्यूसी गुमला को सौंप दिया. इसके बाद लव की स्थिति को देखते हुए सीडब्ल्यूसी ने लव को बालगृह में रखा हुआ है. इस दौरान कई बार लव के पिता डोमरा नगेशिया को इसकी जानकारी दी गयी. लेकिन डेढ़ साल में वह एक बार भी अपने बेटे को देखने नहीं आया.
बली उरांव की कहानी
बली उरांव का घर पालकोट प्रखंड में ही कोई गांव में है. उसके पिता व मां का क्या नाम है. इसका पता नहीं चला है. क्योंकि जब बली पांच साल का था. तभी किसी ने उसे सृजन फाउंडेशन पालकोट के कार्यालय के बाहर दरवाजे के पास छोड़कर भाग गया. अभी बली की उम्र साढ़े छह साल है. डेढ़ साल पहले जब बली को उसके ही परिवार के लोग छोड़कर भाग गये तो सृजन फाउंडेशन उसे गुमला लेकर आ गया. सृजन फाउंडेशन के सदस्यों ने बली को सीडब्ल्यूसी गुमला को सौंप दिया.
बली के परिजनों की काफी तलाश की गयी. लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. सीडब्ल्यूसी की सदस्य सुषमा देवी ने कहा कि जब परिजन नहीं मिले तो बली को बालगृह में रखा गया है. लेकिन अक्सर वह अपने माता पिता को खोजता है. अभी भी उसके परिवार की तलाश की जा रही है. अपील है कि अगर बली को कोई पहचानता है तो वह उसके परिवार को खोजने में मदद करे.
लव व बली दोनों बालगृह में है. लव को उसके पिता अपना बेटा मानने से इंकार कर दिया. फिर भी लव के पिता को संपर्क किया गया है. ताकि वह अपने बच्चे से आकर मिले. परंतु वह अपने बेटे से मिलने नहीं आ रहा. जबकि बली के परिजनों का पता नहीं चल रहा है.
डॉ अशोक मिश्रा, सदस्य, सीडब्ल्यूसी, गुमला
