गुमला : चैनपुर प्रखंड के बारडीह गांव निवासी होटल संचालक बालमोहन मुंडा को भाकपा माओवादी का समर्थक होने के शक में गुमला पुलिस पकड़ कर पूछताछ कर रही है. हालांकि एसपी ने बताया कि बालमोहन को पूछताछ के बाद सोमवार की शाम 4:30 बजे छोड़ दिया गया है, जबकि ग्रामीणाें का आरोप है कि पांच बजे तक बालमोहन को नहीं छोड़ा गया है.
ग्रामीणों के अनुसार, 72 घंटे से पुलिस बालमोहन को रखे हुए है. जब बालमोहन का कसूर पूछने लोग पुलिस पदाधिकारी के पास पहुंचे, तो मुखिया के साथ अभद्र व्यवहार किया गया. इसके बाद गुस्साये लोग सोमवार को बालमोहन को छोड़ने की मांग को लेकर दिन के 12 से लेकर अपराह्न चार बजे तक एसपी के आवासीय कार्यालय के गेट को घेर कर बैठे रहे.
इस दौरान थाना प्रभारी राकेश कुमार व महिला थानेदार सरस्वती मिंज ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया. लेकिन ग्रामीण बालमोहन को मुक्त करने की मांग पर अड़े रहे. साथ ही एसपी से मिलने की बात करते रहे. हाई-वोल्टेज ड्रामा के बाद एसपी अंशुमान कुमार ने अपने कार्यालय में बुला कर मुखिया संध्या देवी व गांव के कुछ लोगों से बात की. एसपी से वार्ता के बाद मुखिया ने कहा कि एसपी से बात हुई है. उन्होंने बताया है कि बालमोहन को पूछताछ के लिए गुमला लाया गया था.
इसके बाद उसे चैनपुर थाना भेजा गया, जहां से बालमोहन को छोड़ दिया गया है. इधर, मुखिया ने कहा है कि बालमोहन निर्दोष है. अगर शक के आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ा है, तो छोड़ दे. बेवजह बारडीह पंचायत के क्षेत्र के लोगों को अगर पुलिस परेशान करेगी, तो हम चुप नहीं बैठेंगे.
मेरे पति ने पुलिस को खिलाया था खाना : मंजू
बालमोहन की पत्नी मंजू देवी ने कहा कि मेरे पति का क्या कसूर था कि पुलिस उसे पकड़ा है. मेरे पति ने तो भूखे लोगों को खाना खिलाया है. लेकिन उलटे मेरे पति को ही माओवादी बता कर पुलिस पकड़ कर थाना ले आयी. उसने कहा कि शुक्रवार को तबेला स्कूल में सीआरपीएफ व कुरूमगढ़ थाना की पुलिस रूकी हुई थी.
उस समय कुरूमगढ़ के थाना प्रभारी नीरज मिश्रा के कहने पर मेरे पति ने थाना प्रभारी को खाना बना कर खिलाया था. लेकिन गुमला से गयी पुलिस ने शनिवार को मेरे पति को इसलिए पकड़ लिया कि बालमोहन ने पुलिस को नहीं, बल्कि माओवादियों को तबेला स्कूल में ले जाकर खाना खिलाया है. मंजू ने कहा कि मेरे पति ने एक तो भलाई की, लेकिन उलटे मेरे पति को ही फंसाने का काम किया गया है.
