अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में हिस्सा लेने श्रीलंका गये गोड्डा के सुधीर

गांव से निकली प्रतिभा बनी वैश्विक पहचान, यूजीसी फेलोशिप प्राप्त शोधकर्ता का गौरवपूर्ण प्रदर्शन

गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड के राजाभिट्ठा थाना क्षेत्र के आमझोर गांव निवासी सुधीर कुमार ने साबित कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी वैश्विक क्षितिज को छू सकती हैं. सुधीर श्रीलंका की यूनिवर्सिटी ऑफ श्री जयवर्धनेपुरा में 19 और 20 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाले पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन इंटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज में शिरकत करेंगे. यह सम्मेलन यूनिवर्सिटी ऑफ जयवर्धनेपुरा के मानवविज्ञान विभाग एवं सार्क कल्चरल सेंटर, श्रीलंका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न देशों के विद्वान, शोधकर्ता और सांस्कृतिक क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे. सुधीर अपने शोध-पत्र रामनगर की रामलीला : काशी की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत शीर्षक से प्रस्तुति देंगे. उनके शोध का मुख्य विषय काशी (रामनगर) की पारंपरिक रामलीला है, जिसे यूनेस्को ने ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ के रूप में मान्यता दी है. यह रामलीला सदियों से भारत की सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक रही है और अब इसकी गरिमा विश्व पटल पर स्थापित हो चुकी है. सुधीर वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इतिहास विभाग में डॉ. सत्यपाल यादव के निर्देशन में शोध कार्यरत हैं. उन्होंने गोड्डा और दुमका के जवाहर नवोदय विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की. इतिहास विषय में बीए और एमए की डिग्री बीएचयू से पूरी की है. वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उन्हें सीनियर रिसर्च फेलोशिप भी प्रदान की जा रही है. सुधीर के बड़े भाई प्रभात रंजन ने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र राजाभिट्ठा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके भाई की कठिन मेहनत, शोध के प्रति गहरी अभिरुचि और अकादमिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है. इस उपलब्धि से पूरे परिवार और क्षेत्र में गर्व का माहौल है.

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By SANJEET KUMAR

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