महागामा प्रखंड के अशोता गांव में तीन मासूम बच्चों को मोहनी और जटामा के बीच सुनसान रास्ते पर छोड़ दिये जाने के मामले को मीडिया में प्रमुखता से उठाये जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया. शुक्रवार को बीडीओ सोनाराम हांसदा, उप प्रमुख निशान खातून तथा बाल विकास संरक्षण इकाई की टीम ने घटनास्थल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की. बाल विकास संरक्षण इकाई की सदस्य अंजली कुमारी ने कहा कि किसी भी बच्चे को इस प्रकार खुले या सुनसान स्थान पर छोड़ना अत्यंत गंभीर और अमानवीय कृत्य है. उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार के सभी प्रावधानों के तहत उन्हें आवश्यक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जाएगा.
प्रारंभिक जांच में सामने आई पारिवारिक विवाद की बात
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चों के माता-पिता का तलाक हो चुका है. बताया जा रहा है कि तलाक से संबंधित राशि का भुगतान नहीं होने के कारण परिजनों ने बच्चों को सुनसान रास्ते पर छोड़ दिया था. घटना का वीडियो और समाचार सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी. जांच टीम के अनुसार फिलहाल तीनों बच्चे महागामा प्रखंड के अशोता गांव में अपने दादा-दादी के पास सुरक्षित हैं. अधिकारियों ने बताया कि मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए बच्चों के पिता से विस्तृत पूछताछ की जाएगी. साथ ही उनकी माता से भी बातचीत कर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
