सोहराय पर्व के तीसरे दिन धूमधाम से मनाया गया खुटूवा पर्व
30 वर्षों बाद पुनर्जीवित हुई पारंपरिक आदिवासी पूजा, मांदर की थाप पर झूमे ग्रामीण
बोआरीजोर प्रखंड के संथाली टोला बोआरीजोर में सोहराय पर्व के तीसरे दिन आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार खुटूवा पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर गांव के जोग मांझी नारायण बेसरा द्वारा विधि-विधान से पर्व का अनुष्ठान संपन्न कराया गया. जोग मांझी ने अपने घर के द्वार के समीप बैल के सींग में सिंदूर और तेल लगाकर तथा फूलों की माला पहनाकर विधिवत पूजा-अर्चना की. माला में पकवान और रुपये भी अर्पित किये गये. आदिवासी परंपरा के अनुसार इस अवसर पर घर के दामाद द्वारा बैल को खूंटे से बांधा गया तथा खूंटा भी दामाद के हाथों ही गाड़ा गया. पारंपरिक पूजा-अर्चना में गांव के सभी ग्रामीण शामिल हुए. पूजा के दौरान ग्रामीणों ने मांदर की थाप पर बैल के चारों ओर नृत्य करते हुए परिक्रमा की, जिससे पूरा वातावरण उल्लास और उत्सव से भर उठा. ग्रामीणों में इस अवसर पर विशेष उत्साह देखने को मिला. उल्लेखनीय है कि गांव में खुटूवा पर्व की यह पूजा लगभग 30 वर्षों के बाद संपन्न हुई, जिससे ग्रामीणों में विशेष हर्ष और गौरव का भाव देखा गया. इस अवसर पर सुनील मुर्मू, हराधन बेसरा, ताला सोरेन, बबलू मुर्मू, लखन सोरेन, सच्चिदानंद सोरेन, रघु मुर्मू, सांझला सोरेन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
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