बसडीहा गांव में काली पूजा की धूम, तैयारियां जोर-शोर से जारी

150 वर्षों से चली आ रही परंपरा, मां काली की भव्य प्रतिमा बनाकर होगा पूजन-अर्चना

राजमहल कोल परियोजना के प्रभावित बसडीहा गांव में काली पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. ग्रामीण एवं पूजा समिति के सदस्य इस पावन पर्व को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं. मां काली की भव्य प्रतिमा निर्माण कारीगरों द्वारा की जा रही है. ग्रामीण अंजू देवी, शैली देवी, अरुण और संदीप ने बताया कि लगभग 150 वर्षों से यहां के काली मंदिर में मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही मंदिर प्रांगण में भव्य मेला भी आयोजित होता है. काली पूजा के दिन बकरी की बलि दी जाती है, जो इस पूजा की एक महत्वपूर्ण परंपरा है. ग्रामीणों का मानना है कि मां काली की पूजा-अर्चना से गांव में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इस अवसर पर आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु मंदिर प्रांगण पहुंचते हैं और मेले का आनंद लेते हैं. पूजा समिति के सदस्यों ने कहा कि मां काली अत्यंत शक्तिशाली देवी हैं, जो सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं. इस विश्वास के साथ ग्रामीण इस वर्ष भी श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करेंगे.

क्या कहते हैं ग्रामीण

मंदिर प्रांगण एवं मेले में श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी न हो, इसके लिए समिति के सदस्य पूरी सक्रियता से कार्य करेंगे. भक्तगण माता का दर्शन आराम से कर सकें, इसकी भी व्यवस्था की जाएगी.

-जितेंद्र लोहार, ग्रामीण

गांव के सभी ग्रामीणों के सहयोग से माता की पूजा सफलतापूर्वक संपन्न होती है. माता का आशीर्वाद गांव पर सदैव बना रहता है. मेले में भीड़ नियंत्रण हेतु स्वयंसेवकों की टीम बनायी गयी है.

-सुबोध लोहार, ग्रामीण

यह गांव परियोजना से प्रभावित है और कई ग्रामीणों का पुनर्वास प्रबंधन द्वारा किया गया है. बावजूद इसके, पूजा के दौरान सभी ग्रामीण अपने पुराने गांव आकर माता की भक्ति-अर्चना करते हैं.

-शिवपूजन पंडित, ग्रामीणB

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By SANJEET KUMAR

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