वैश्विक अस्थिरता के बीच रणनीतिक संपदा बनता सोना, पढ़ें सतीश सिंह का आलेख

ब्याज दरें ऊंची होने के बावजूद सोने में तेजी आना एक बड़े बदलाव का सूचक है. पश्चिम एशिया का संकट गहराने से रुपये में गिरावट आने और महंगाई बढ़ने से सोने के दाम में और तेजी आने की आशंका बढ़ गयी है.

सोना अब सिर्फ कीमती धातु नहीं रहा, बल्कि गैरसरकारी मुद्रा के रूप में भी इसे पहचाना जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका मूल्य 5,170 डॉलर प्रति औंस (31.103 ग्राम) तक पहुंच चुका है, जबकि घरेलू बाजार में यह प्रति 10 ग्राम 1.61 लाख रुपये से ऊपर है. सितंबर, 2024 से इसमें कोई बड़ी या स्थायी गिरावट नहीं देखी गयी है. ऐसे में, सोने के दाम लगातार बढ़ने को सिर्फ तेजी नहीं कह सकते, यह वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है. सोने में स्थायी तेजी का मुख्य कारण दरअसल इसमें तेजी से बढ़ता निवेश है और पारंपरिक निवेशक भी इसमें निवेश कर रहे हैं. यही नहीं, अब सोने की कीमत हर उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद लगभग आठ से नौ महीनों तक स्थिर रहती है.

गौर करने की बात यह भी है कि खासकर पिछले दो वर्षों में सोने में निवेश करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक हो गया है. सितंबर, 2024 में पहली बार सोना 75,000 रुपये से ऊपर चला गया था. उसके बाद मामूली गिरावट के बावजूद इसकी कीमत में लगातार वृद्धि ही होती रही है. विगत 29 जनवरी को यह 1.75 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया था और अभी इसकी कीमत करीब 1.6 लाख रुपये है. ऐसे में, सोने के 1.30 लाख रुपये से नीचे गिरने की संभावना कम है.

सोने की कीमत पांच साल में 40,000 से 75,000 रुपये तक पहुंच गयी, जबकि एक लाख से डेढ़ लाख का सफर इसने करीब छह महीने में तय कर लिया. उनतीस अगस्त, 2019 को सोना पहली बार 40,220 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया था. फिर 25 सितंबर, 2024 को यह पहली बार 75,248 रुपये हो गया. तेईस जुलाई, 2025 को सोना पहली बार एक लाख रुपये के पार गया, जबकि 21 जनवरी, 2026 को यह डेढ़ लाख रुपये का स्तर पार कर गया.

परंपरागत रूप से जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तब सोने की कीमत घटती है, क्योंकि सोने में निवेश पर ब्याज नहीं मिलता. वर्ष 2023 से 2025 के बीच इस परिदृश्य में बदलाव आया है. ब्याज दरें ऊंची होने के बावजूद सोने की कीमत बढ़ रही है, जो एक बड़े परिवर्तन का संकेत है. अब निवेशक सरकारी बॉन्ड पर कम भरोसा कर रहे हैं और सोने को एक गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में देख रहे हैं. सरकार द्वारा इसका मूल्यवर्धन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी कीमत बाजार की स्थिति, भू-राजनीतिक हालात, अर्थव्यवस्था की स्थिति आदि पर निर्भर करती है. अभी रुपया कमजोर होने के कारण सोना अधिक आकर्षक हो गया है, जिससे गोल्ड इटीएफ में निवेश में तेजी आयी है.

लंबी अवधि के लिए सोना न केवल जोखिम से सुरक्षा का साधन है, बल्कि एक रणनीतिक संपदा भी बन चुका है. पश्चिम एशिया, एशिया और पश्चिमी यूरोप में अस्थिरता के कारण निवेशकों का डॉलर आधारित प्रणाली में विश्वास घट रहा है. इसके मुकाबले, विश्व के केंद्रीय बैंक पिछले चार वर्षों से लगभग 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं, ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके. वहीं सोने की आपूर्ति में भी कमी देखने को मिली है, क्योंकि हाल के वर्षों में कोई नयी खदान शुरू नहीं हुई है, इसके अलावा खदानों को संचालित करने में भी समय लगता है. पश्चिम एशिया का संकट गहराने से रुपये में गिरावट आने और महंगाई बढ़ने से सोने के दाम में और तेजी आने की आशंका बढ़ गयी है.

इधर, सेबी ने एक्टिव इक्विटी स्कीम को सोना और चांदी में निवेश की अनुमति दी है. इसका उद्देश्य यह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट आये, तब सोने और चांदी की संभावित बढ़त से नुकसान की पूर्ति हो सके. सेबी का यह निर्णय सोना-चांदी के लिए लाभदायक साबित होगा. जाहिर है, इससे सोना-चांदी की मांग और कीमत, दोनों में इजाफा होगा. हालांकि इस साल सोने की कीमत में करीब 20 फीसदी और चांदी की कीमत में 14 प्रतिशत की वृद्धि पहले ही हो चुकी है.

सोने की कीमत बढ़ने के साथ इसमें निवेश की मांग भी बढ़ी है और आज के युवा भी इसमें अग्रणी हैं. आंकड़ों के अनुसार, करीब 65 प्रतिशत मिलेनियल्स, यानी युवा सोने के बजाय डिजिटल गोल्ड, इटीएफ और म्यूचुअल फंड में निवेश करना पसंद कर रहे हैं. वर्ष 2025 में गोल्ड इटीएफ में निवेशकों की भागीदारी में 60 फीसदी की वार्षिक वृद्धि देखी गयी, जो दर्शाती है कि आम लोग अब पारंपरिक गहनों से हटकर वित्तीय सोने में रुचि ले रहे हैं. निवेशकों में से 85 फीसदी से अधिक सोने को धन के संरक्षण और महंगाई से सुरक्षा का माध्यम मानते हैं.

शहरी क्षेत्र में डिजिटल सोने की लोकप्रियता बढ़ रही है, हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में अब भी लोग सोना खरीदना या सोने के बदले कर्ज लेना पसंद करते हैं. इस तरह, बदलते आर्थिक परिदृश्य में सोने में निवेश एक बहुत ही लोकप्रिय और सुरक्षित विकल्प बना हुआ है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और अन्य वित्तीय सर्वेक्षण बताते हैं कि भारतीयों में सोने में निवेश के रूप में रुचि बढ़ी है. सोना अभी तक सीधे लेनदेन के लिए आधिकारिक मुद्रा नहीं है, लेकिन लोग इसे गैर-सरकारी मुद्रा के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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