देवोत्थान एकादशी को लेकर श्रद्धालु अपने घरों में गन्ने का मंडप तैयार किया और शालीग्राम व तुलसी का विवाह भी संपन्न कराया. दीप जलाकर तथा चुनरी चढ़ाकर तुलसी महारानी की पूजा की गयी. भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित कर उनकी आराधना की गयी. इस अवसर पर बाजार में विशेष रौनक देखी गई. लोगों ने पूजन सामग्री की खरीदी कर भगवान श्री विष्णु की पूजा की. भगला काली मंदिर के पुजारी बाबूलाल पांडेय ने देवोत्थान एकादशी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला.
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं
उन्होंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं. चातुर्मास की समाप्ति के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्री हरि योग निद्रा से जागते हैं. इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. तुलसी विवाह से विशेष लाभ होता है. इस दिन से रुके हुए सभी मांगलिक कार्य विवाह, यज्ञ, मुंडन, उपनयन, कर्ण वेध, गृह प्रवेश शुरू हो जाते हैं. इस वर्ष वैवाहिक कार्यक्रम 18 नवंबर 2025 से शुरू होगा, जो 14 मार्च 2026 तक चलेगा.
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