छठ पर्व की तर्ज पर इस क्षेत्र में सूर्योपासना का यह पर्व बड़का पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसे डलिया पर्व या इतवार पर्व के रूप में भी जाना जाता है. यह पर्व छठ पूजा के तुरंत बाद पड़ने वाले रविवार को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत शुक्रवार को नहाय खाय से होती है. शनिवार को व्रतियों ने उपवास कर खरना का प्रसाद ग्रहण व वितरण किया. वहीं, रविवार की दोपहर के बाद सूप लेकर अर्घ प्रदान करने के लिए घाटों की ओर चले. इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल तथा अन्य वाद्य यंत्र भी बजे.
गीतों से माहौल हो गया भक्तिमय
छठ मैया व भगवान सूर्य के गीत से क्षेत्र पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया. व्रतियों ने शाम में सरिया बाजार के राय तालाब, मैनेजर तालाब, चंद्रमारणी स्थित भोंगी बांध, बड़की सरिया स्थित पोखरिया तालाब, चौधरीडीह के बंगाली तालाब,राजदहधाम स्थित उत्तरवाहिनी बराकर नदी घाट, खेढुवा नदी तट, घुठिया पेसरा, कोयरीडीह, बंदखारो, केशवारी, कसियाडीह, नावाडीह, रतनाडीह, बागोडीह, परसिया अमनारी, कैलाटांड़, अमनारी समेत अन्य गांवों के तालाब में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ दिया. मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु जुटे और भगवान भास्कर को अर्घ दिया. सोमवार को उदयगामी सूर्य को अर्घ व पूजन घर के आंगन में देकर इस महापर्व को संपन्न किया जायेगा. लोग इस पर्व की तैयारी महीनों पहले से करने लगते हैं. सरिया क्षेत्र में यह त्योहार परंपरा से बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.
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