कानीकेंद-धनेता में, ग्रामीणों में दहशत; घर से निकलने में भी डर
विनोद पांडेय की रिपोर्ट
गिरिडीह. गावां प्रखंड में झुंड से बिछड़े हाथियों का उत्पात लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा. शुक्रवार की रात हाथियों के झुंड ने कानीकेंद और धनेता समेत आसपास के इलाकों में जमकर नुकसान किया. हाथियों ने खेतों में लगी फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया. इसके अलावा खेतों में सिंचाई के लिए लगायी गयी पाइप को भी क्षतिग्रस्त कर दिया. कानीकेंद गांव में हाथियों ने एक मवेशी को पटककर मार डाला. लगातार हो रहे नुकसान से ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है.
फसलों को भी भारी नुकसान
कानीकेंद निवासी लखन यादव का मवेशी रात में घर के पास बंधा हुआ था. इसी दौरान हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया. एक हाथी ने मवेशी को पटककर मार डाला. इसके बाद हाथियों ने खेतों की ओर रुख किया और सिंचाई के लिए बिछायी गयी पाइप को क्षतिग्रस्त कर दिया. ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने कानीकेंद और धनेता के आसपास कई खेतों में लगी फसलों को भी रौंद दिया. इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है.
एक रात पहले घर को किया था क्षतिग्रस्त
हाथियों का उत्पात केवल शुक्रवार रात तक सीमित नहीं रहा. इससे एक रात पहले गुरुवार को भी हाथियों ने पथलडिहा गांव में नुकसान पहुंचाया था. वहां हाथियों ने लालो भगत के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया था. इसके साथ ही खेतों में लगी फसलों को भी रौंदकर बर्बाद किया था. लगातार दो रात से हाथियों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले हाथी फसलों और घरों को नुकसान पहुंचा रहे थे, लेकिन अब मवेशी की मौत की घटना से खतरा और बढ़ गया है.
रात में घर से निकलने से बच रहे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, झुंड से अलग हुए हाथियों के कारण रात के समय विशेष खतरा बना हुआ है. हाथियों की गतिविधियों का कोई निश्चित ठिकाना नहीं होने के कारण लोग डरे हुए हैं. ग्रामीण रात में घर से बाहर निकलने से भी बच रहे हैं. किसानों को अपनी फसलों की चिंता के साथ-साथ जान-माल की सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है.
आबादी से दूर करने की मांग
लोगों का कहना है कि यदि हाथियों को समय रहते आबादी वाले क्षेत्रों से दूर नहीं किया गया तो इंसान और हाथियों के बीच टकराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है. ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और उन्हें सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर करने की मांग की है.
मुआवजा देने की मांग
हाथियों के उत्पात से प्रभावित ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से नुकसान का जल्द आकलन कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि फसल, मकान, सिंचाई पाइप और मवेशी के नुकसान से उन्हें आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है. इसलिए प्रभावित परिवारों को सरकारी प्रावधान के अनुसार जल्द मुआवजा दिया जाना चाहिए.
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लोगों के जीवन पर भी खतरा
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने और गांवों में सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है. लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में नुकसान के साथ लोगों के जीवन पर भी खतरा बढ़ सकता है.
