बैठक की अध्यक्षता जिला महासचिव सुखदेव हाजरा ने की. मुख्य अतिथि महासंघ के जिलाध्यक्ष सह प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नारायण महतो उपस्थित थे. नारायण महतो ने कहा कि राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था सहायक अध्यापकों के कंधे पर टिकी है. हम जनगणना से लेकर चुनाव तक के सारे सरकारी कार्य पूरी निष्ठा से करते हैं. लेकिन जब समान काम-समान वेतन की बात आती है, तो सरकार मौन हो जाती है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए मांग की कि राज्य के सभी जेटेट उत्तीर्ण शिक्षकों का समायोजन अविलंब सहायक आचार्य के पदों पर किया जाये. बैठक में शिक्षकों ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि डाटा समय पर अपलोड ना होने के कारण शिक्षकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है. शहरी क्षेत्र के शिक्षकों का चार प्रतिशत इंक्रीमेंट वर्ष 2023 से लंबित है. इपीएफ की कटौती तो हो रही है, लेकिन पेंशन मद में राशि नहीं जमा होने से भविष्य असुरक्षित है.
पांच बार जांच के बाद मांगा जा रहा मूल प्रमाणपत्र
शिक्षकों ने कहा कि जब पांच बार जांच हो चुकी है और पैसे भी लिये जा चुके हैं, तो बार-बार मूल प्रमाण पत्र मांगना शिक्षकों का मानसिक शोषण है. जिले के 269 पारा शिक्षकों का मानदेय एक वर्ष से बंद है, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.
जिला कार्यसमिति का विस्तार
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से जिला कार्यकारिणी समिति का विस्तार किया गया. इसमें प्रखंडों से प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. गिरिडीह सदर से ठाकुर दास, पीरटांड़ से सुरेश प्रसाद महतो, अरुण कुमार मंडल, बगोदर से रामचंद्र मंडल, बेंगाबाद से उमा शंकर राणा, जमुआ से पुनीचंद मंडल, तिसरी से कामेश्वर प्रसाद यादव, गांडेय से डमरूलाल मरांडी, देवरी से मनोज यादव कार्यकारिणी समिति में शामिल किया गया. बैठक में मनोज कुमार शर्मा, दीपक कुमार, लालजीत यादव, दिलीप यादव, मुन्ना दास, नागेश्वर महतो, यीशु हेंब्रम, बोड़ला टुडू, अजय कुमार, दिनेश बर्णवाल सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित थे.
