दशलक्षण पर्व के 10वें दिन शनिवार को अनंत चतुर्दशी पूजन विधान के साथ महापर्व की पूर्णाहुति हुई. इसरी बाजार के जैन मंदिर में पूरे भक्ति भाव से उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के पालन के साथ भक्तों ने ईश्वरीय आनंद का अनुभव किया. प्रातः काल में भगवन का अभिषेक कर पूजन किया. दर्जनों जैन धर्मावलंबियों ने उपवास रखे. सुनील कुमार जैन ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य सभी धर्मों का सार है. धर्म कहता है पंच इंद्रियों पर नियंत्रण, परस्त्री गमन का निषेध, सांसारिक भोग-विलास और मोहमाया का त्याग कर निर्मल ज्ञान स्वरूप आत्मा में लीन होने और परमात्मा से साक्षात्कार करना चाहिए.
भारतीय संस्कृति में ब्रह्मचारी की सदा होती है प्रशंसा
भारतीय संस्कृति में ब्रह्मचारी की सदा प्रशंसा, अनुमोदना और पूजा की जाती है और व्यभिचारी की सदा निंदा की है. जैसे सर्प के पांव दिखाई नहीं देते, वैसे ही इंसान की वासना दिखाई नहीं देती. इस वासना को नियंत्रित कर वीर्यवान युवा बनना चाहिए. आज के समाज में स्त्री के बाल कटते जा रहे हैं और पुरुषों के बढ़ते जा रहे हैं. पहनावा अश्लील होता जा रहा है. यह संस्कृति और शील का अपमान है. हमें अपने शील और संस्कृति की रक्षा की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए. पूजन विधान में सोम जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, रश्मि जैन, सीमा जैन, मयंक जिनेश जैन, रूबी जैन, संगीता जैन, मीना जैन, नीता जैन, अनिता जैन इत्यादि अनेकों जैन धर्मावलंबी उपस्थित थे.
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