Teacher''s day: निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं अभय चतुर्वेदी

Teacher's day: विपरीत परिस्थितियों में भी गावां प्रखंड में एक ऐसा विद्यालय है, जहां जाने के बाद मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है. वहां विद्यालय में प्रवेश करते ही सुरम्य वातावरण, उत्तम शैक्षिक माहौल व अनुशासन देखकर काफी खुशी मिलती है.

सरकारी विद्यालयों की लचर व्यवस्था, वित्तीय गड़बड़ी, शैक्षिक माहौल का अभाव एक आम समस्या बनकर रह गयी है. लोगों का रुझान सरकारी से अधिक प्राइवेट विद्यालयों की ओर होने लगा है. इस विपरीत परिस्थितियों में भी गावां प्रखंड में एक ऐसा विद्यालय है, जहां जाने के बाद मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है. वहां विद्यालय में प्रवेश करते ही सुरम्य वातावरण, उत्तम शैक्षिक माहौल व अनुशासन देखकर काफी खुशी मिलती है. यह विद्यालय गावां प्रखंड मुख्यालय से लगभग 18 किमी की दूरी पर स्थित है. उत्क्रमित उच्च विद्यालय जमडार में यह सब यहां पदस्थापित प्रधानाध्यापक अभय चतुर्वेदी की कर्तव्य निष्ठा के कारण संभव हो सका. अभय शिक्षक की नियुक्ति यहां दो फरवरी 2015 को हुई थी. उस समय विद्यालय में 20 बच्चों की उपस्थिति रहती थी. स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने शिक्षकों के सहयोग से ग्रामीणों की बैठक बुलाई. वहीं, घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित भी किया. विद्यालय का रुटीन बनाकर बहुवर्षीय क्लास लेना भी शुरू किया, जिससे विद्यालय में योग्य शैक्षिक वातावरण बना व यहां नामांकन के लिए अभिभावकों ने भी रुचि दिखायी. वर्तमान यहां लगभग 700 बच्चे नामांकित हैं.

कोडरमा जिले के भी बच्चे भी आते हैं पढ़ने

आज स्थिति यह है कि यहां तिसरी प्रखंड के अलावा कोडरमा जिले के छात्र भी यहां पढ़ाई के लिए पहुंचने लगे. अभय की प्रेरणा से बच्चे जूता, बेल्ट व टाई आदि लगाकर विद्यालय आने लगे. वाद्य व ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से यहां प्रार्थना होती है. समय-समय पर भाषण प्रतियोगिता व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन यहां की एक और विशेषताओं में से एक है. अभय ने बच्चों में नेतृत्व विकास के लिए प्रत्येक टोला के बच्चे को एक दिन का संपूर्ण प्रभारी बनाया. सोमवार के दिन महात्मा गांधी समूह के बच्चे प्रार्थना से लेकर मध्याह्न भोजन से लेकर सारे क्रिया कलाप की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे. बाद में सरकार ने इसी कार्यक्रम को प्रयास का नाम दिया. सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा देने का परिणाम यह हुआ कि प्रखंड में यह विद्यालय कई पुरस्कार जीत चुका है. जिले और राज्य स्तर पर भी कई पुरस्कार विद्यालय को मिला. इस विद्यालय की चंपा कुमारी प्रथम भारतीय है, जिसे डायना अवार्ड से सम्मानित किया गया. आज भी वह हर एक काम करने से पहले एक बार इससे राय जरूर ली जाती है.

घायल बच्चे को कंधे पर पहुंचाया घर

सितंबर माह में एक बच्चा पैर में हुए जख्म से काफी परेशान था. उसका घर विद्यालय से लगभग पांच किमी की दूरी पर है. रास्ते में घना जंगल व नदी भी है. अभय शिक्षकों के साथ बच्चे को कंधे पर उठाकर उसके घर पहुंचाया. एक बार वह वर्ग में उपस्थिति ले रहे थे. इसमें कुछ बच्चों ने बताया कि बच्चा पवन कुमार काफी बीमार है. वह अपने शिक्षकों के साथ उसके घर गये. पवन उन्हें देखकर रोने लगा. उन्होंने आर्थिक सहायता दी. पिता ने भी कहा कि यह कुछ दिनों का मेहमान है. फिर इन्होंने कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन से बात की. सभी स्कूल जाकर पैसे इकट्ठा किये. व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया, जिसका नाम हेल्पिंग हैंड्स का पवन था. बाद में अनूप संथालिया व पूर्व विधायक राजकुमार यादव से ये मिले. सभी के प्रयास से पवन को दिल्ली भेजा गया. वहां चिकित्सकों ने उसका लंबे दिनों तक उपचार किया. प्रखंड के कई एनजीओ व विद्यालयों ने उसकी मदद की. इसका परिणाम यह रहा कि वह ठीक हो गया और आज वह एक कंपनी में काम कर रहा है.

जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों ने सुविधा बढ़ाने में की सहायता

अभय ने समाजसेवियों से मिलकर अपने विद्यालय के लिए कुछ न कुछ फंड देने की बात की. मुखिया ने चबूतरा दिया, रोड बनवाया और दो-तीन चापाकल लगवा दिया. इनके यहां स्मार्ट क्लास की व्यवस्था वर्ष 2018 में ही की गयी. उन्हें कभी रोड पर पत्थर दिख जाये, तो चाहे कितने भी व्यस्तता हो, पहले उसे हटाते हैं. बीच में जंगलों को साफ करते हैं. रोड पर उगे झाड़ियां को साफ करते हैं, ताकि सामने से गाड़ी दिखाई दे और दुर्घटना ना हो. वर्तमान में क्षेत्र में यह विद्यालय अपने उत्तम शैक्षिक माहौल व सुव्यवस्था के लिए काफी प्रसिद्ध हो चुका है. यह यहां के प्रधानाचार्य व शिक्षकों के लग्न व परिश्रम का ही परिणाम है.

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Author: MAYANK TIWARI

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