खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले के विभिन्न इलाकों में नियमित रूप से जांच अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान सड़क किनारे, चौक-चौराहों और भीड़ वाले इलाकों में लगे स्ट्रीट फूड स्टॉल की जांच की जा रही है. जांच के क्रम में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई की स्थिति और खाद्य सुरक्षा मानकों का भी निरीक्षण किया जा रहा है. कई जगहों पर यह पाया गया कि दुकानों के पास ना तो लाइसेंस था और ना ही रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध था. जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दुकानदारों को मौखिक और लिखित रूप से चेतावनी भी दे रहे हैं. उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया जा रहा है कि वे जल्द से जल्द खाद्य सुरक्षा विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन करायें और लाइसेंस प्राप्त करें. इसके बावजूद कई स्ट्रीट फूड दुकानदार नियमों को हल्के में लेते हुए आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं. बताया जा रहा है की कुछ दुकानदार जागरूकता की कमी का हवाला दे रहे हैं, जबकि कई जानबूझकर नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
जिले में 1769 स्ट्रीट फूड दुकानों का हुआ रजिस्ट्रेशन, 672 के पास हैं खाद्य लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बजटो गांव में पिछले दिनों हुई फूड प्वाइजनिंग की घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. इस गंभीर घटना को प्रशासन ने लापरवाही का परिणाम मानते हुए डीसी रामनिवास यादव के निर्देश पर जिलेभर में स्ट्रीट फ़ूड दुकानों की सघन जांच अभियान शुरू किया गया था. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम लगातार शहर और ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट फूड दुकानों की जांच कर रही है. जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई, उपयोग में लाये जा रहे कच्चे माल और सबसे अहम खाद्य सुरक्षा विभाग से पंजीकरण व लाइसेंस की स्थिति की पड़ताल की जा रही है. इसी कारण बड़ी संख्या में दुकानदारों ने अपने-अपने स्टॉल का खाद्य सुरक्षा विभाग में रजिस्ट्रेशन भी कराया है. हालांकि इसके बावजूद अब भी अधिकांश दुकानदार नियमों की अनदेखी करते हुए बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के ही अपना व्यवसाय चला रहे हैं. मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिलेभर में अब तक करीब 1769 स्ट्रीट फूड दुकानदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि मात्र 672 दुकानदारों को ही खाद्य लाइसेंस प्राप्त हुआ है. हाल ही में रांची से आयी टीम ने भी पूरे जिले में अभियान चलाकर जांच की. इसके बाद भी खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर नहीं दिख रहा है.
