धनवार प्रखंड की बरजो पंचायत अंतर्गत झरहा गांव (कोड़ाडीह-गंगापुर के समीप) के निवासी रोहित पांडेय ने अभिनय की दुनिया में खास मुकाम हासिल किया है. छोटे से गांव से निकलकर मुंबई जैसे महानगर में थिएटर, फिल्म और टीवी के मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना, न केवल रोहित, बल्कि इलाके के लिए गौरव की बात है. टीवी से लेकर बड़े पर्दे पर वह अपनी अभिनय कला का जौहर बिखेर रहा है.
नाटकों से निखारा अभिनय कौशल
रोहित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय निजी विद्यालय से हासिल करते हुए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से थिएटर में पीजी कर अभिनय की बारीकियां सीखीं. इसी दौरान उन्होंने नाटकों के जरिये अपने अभिनय कौशल को तराशा. दस वर्षों से लगातार थिएटर में सक्रिय रोहित ने कई नाटकों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. उनकी सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और छोटे गांव-कस्बों से बड़े सपने देखने का साहस करते हैं. हाल ही में उन्होंने “शो मस्ट गो ऑन” नाटक में अपने जीवन का पहला सोलो किरदार निभाया.
दर्शकों के बीच बनायी अलग छवि
थिएटर की दुनिया से आगे बढ़ते हुए रोहित ने सिनेमा में भी दस्तक दी. ओटीटी पर रिलीज मशहूर निर्देशक प्रकाश झा की फिल्म “परीक्षा” में उन्होंने एक किरदार निभाया. छोटी मगर प्रभावशाली भूमिका से उन्होंने दर्शकों का ध्यान खींचा और अपनी पहचान फिल्मों में भी दर्ज करायी. इसके पूर्व टीवी की दुनिया में भी रोहित ने अपने अभिनय से जगह बनायी. लोकप्रिय सीरियल ‘वसुधा’ में डायरेक्टर करण की भूमिका निभाकर उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग छवि बनायी है. यह उनके करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है.
थिएटर जड़ है, सिनेमा और टीवी शाखाएं
गांव से निकलकर महानगर में संघर्ष और सफलता की इस कहानी को रोहित खुद अपनी यात्रा के रूप में महसूस करते हैं. मंगलवार को गांव आये रोहित का कहना है थिएटर उनकी जड़ है, सिनेमा और टीवी उसकी शाखाएं. दोनों का संगम ही उनकी यात्रा है. भावुक होकर कहा कि दर्शकों की सराहना ने इसे अविस्मरणीय बना दिया. मौरे पर उन्होंने अपने गुरुजनों, साथियों और निर्देशक नियति राठौर के प्रति विशेष आभार जताया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
