प्रमाण सागर ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं, बल्कि संयम, तप और त्याग के मार्ग पर अग्रसर होना है. मुनि श्री ने कहा कि भोग-विलास से शरीर को स्थायी सुख नहीं मिलता, बल्कि आसक्ति और अशांति बढ़ती है. मनुष्य निरंतर अधिक पाने की चाह में उलझा रहता है, लेकिन यह चाह कभी समाप्त नहीं होती. परिणामस्वरूप संतोष नहीं मिलता और तृष्णा बढ़ती जाती है. श्रद्धालुओं से कहा कि वे केवल दीक्षा देखने या प्रवचन सुनने के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर वैराग्य के भाव जागृत करने के लिए आये हैं. यदि दीक्षा से वैराग्य उत्पन्न हो जाये, तो कार्यक्रम में आना सार्थक हो जाता है.
कल निकलेगी शोभा यात्रा
गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 18 अप्रैल की सुबह 9:30 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी. इसके बाद 10 बजे से गुणायतन में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज व मुनि श्री संधान सागर महाराज के सान्निध्य में दीक्षा समारोह होगा. इसमें अवसर तीन वैराग्यवान संयम जीवन को अंगीकार करेंगी. शोभायात्रा के बाद ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, पाद-प्रक्षालन, अतिथियों के उदबोधन तथा प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैयाजी व अभय भैयाजी द्वारा दीक्षा विधि सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे.
