आम के पेड़ों में लगे हुए फल देख किसानों के चेहरे खिले हुए हैं. अच्छी फसल से किसान जहां गदगद हैं, वहीं आने वाले समय में आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद भी जगी है. इधर, जिन किसानों ने अब तक इस योजना का लाभ नहीं लिया है और उनके पास पर्याप्त जमीन है, वे अब इससे जुड़ने का मन बनाने लगे हैं.
50 से अधिक बागवानी हो चुकीं हैं तैयार
बता दें कि चार साल पूर्व आम बागवानी योजना की शुरुआत हुई थी. प्रारंभ में गिने-चुने किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया और अपनी जमीन पर आम के पौधे लगाये. मनरेगा से किसानों को बागवानी लगाने, उसकी देखभाल करने, सुरक्षा व सिंचाई करने सहित अन्य मदों में तीन साल तक राशि उपलब्ध करायी गयी. अपनी जमीन पर बागवानी लगाने के साथ-साथ मनरेगा से भुगतान मिलने से कई किसानों ने इसे अपनी संपत्ति समझकर इसकी बेहतर देखभाल किया. हालांकि, कई किसानों ने सिर्फ पौधे लगाकर राशि निकासी के फेर में लगे रहे. जिन किसानों ने बेहतर देखभाल किये उसके खेतों में आज आम का बगीचा देखते ही बनता है, जबकि सिर्फ राशि निकासी के फेर में जुटे किसानों के खेत आज भी बंजर पड़ा है. बेंगाबाद प्रखंड की 25 पंचायतों में वर्तमान में लगभग 50 आम बागवानी तैयार हो चुकी है, जिसमें अब फल लगने लगे हैं.
भविष्य में किसानों को होगा लाभ
मधवाडीह पंचायत के मुखिया मो सदिक अंसारी, महुआर के पूर्व मुखिया राजकुमार पांसी, कर्णपुरा के आस्था गांव निवासी खुर्शीद अनवर हादी, चकरदाहा के दीपक पाठक सहित अन्य किसानों का कहना है कि वे चार साल पूर्व अपनी खाली पड़ी जमीन पर आम बागवानी लगवायी. बेहतर देखभाल किया. दो साल तक पौधों की सुरक्षा के बाद पौध पेड़ का रूप लेने लगे. समय-समय पर सिंचाई होने से बगीचा सज गया है. इस बार आम की अच्छी फसल हुई है. कम मात्रा में ही सही सभी पेड़ों में आम के फल लगे हैं. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होगा, फसल भी ज्यादा होगी. कहा यह महत्वपूर्ण योजना है, जिससे किसानों को लंबे समय तक आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में सहायक साबित होगा.
