आजादी से पहले स्थापित महेशमुंडा स्टेशन आज भी यात्री सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. कोडरमा-गिरिडीह रेल लाइन के विस्तार के दौरान स्टेशन का नया भवन तो तैयार हो गया, पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं अब भी बदहाल हैं.
प्लेटफॉर्म पर जलजमाव, गंदगी और झाड़ियों के बीच यात्रियों को ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में सवाल है कि नया भवन बनाने के बाद रेलवे ने यात्री सुविधाओं की सुध क्यों नहीं ली.
महत्वपूर्ण स्टेशन होते हुए भी अनदेखी क्यों ?
महेशमुंडा स्टेशन गिरिडीह-मधुपुर रेलखंड का महत्वपूर्ण स्टेशन है. महेशमुंडा, गांडेय, बुधुडीह, अहिल्यापुर और बेंगाबाद क्षेत्र के लोग यहां से गिरिडीह, मधुपुर, आसनसोल, कोलकाता और पटना समेत अन्य शहरों की यात्रा करते हैं. रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बावजूद स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.
शौचालय बंद, पानी भी नहीं
स्थानीय यात्रियों के अनुसार स्टेशन पर बना शौचालय बंद पड़ा है. चापाकल खराब है और पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं. प्लेटफॉर्म का शेड भी जर्जर स्थिति में है. बारिश के दिनों में जलजमाव की समस्या और बढ़ जाती है.
लोगों में संक्रमण और दुर्घटना का अंदेशा
प्लेटफॉर्म के दोनों ओर झाड़ियां उग आयी हैं और परिसर में जगह-जगह कचरे का ढेर लगा है. इससे यात्रियों को परेशानी के साथ संक्रमण और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है.
लोग कर रहे रेलवे से सवाल
जब स्टेशन भवन का निर्माण और प्लेटफॉर्म के जीर्णोद्धार पर काम हो रहा है, तो यात्रियों की बुनियादी सुविधाएं कब दुरुस्त होंगी? बंद शौचालय, खराब पेयजल व्यवस्था और गंदगी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय यात्रियों ने रेलवे से स्टेशन की नियमित सफाई, पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था और जर्जर शेड की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है.
