Giridih News :गर्मी से जनजीवन अस्त व्यस्त, सूख रहे जलस्रोत

Giridih News :सरिया प्रखंड क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है.

दोपहर होते-होते बाजार और सड़कें वीरान नजर आने लगती हैं. कड़ी धूप तथा तपती गर्मी से जल स्रोतों पर संकट आ खड़ा हुआ है. नदी, नाले, ताल-तलैया सूखने लगे हैं. इससे लोगों सहित पशुओं की परेशानी बढ़ गयी है.

आबादी वाले क्षेत्र में घुस से जंगली जानवर

जंगली जानवरों पर विशेष असर पड़ा है. सियार, लोमड़ी, गीदड़ जैसे जंगली जानवर पानी की खोज में रात को गांव की ओर चले आते हैं. पशुपालकों को भी जानवरों को पानी पिलाने में कठिनाई हो रही है. पानी का जलस्तर नीचे जाने के कारण स्वयं के लिए भी पेयजल प्राप्त करना उनके लिए मुसीबत सा खड़ा हो रहा है.

प्रखंड के कई जलमीनार से नहीं मिल रहा पानी

वहीं, ग्रामीण इलाकों में भी पेयजल संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से तापमान 41 डिग्री रह रहा है. सुबह 10 बजे ही पारा 38 डिग्री पार कर जा रहा है और दोपहर 12 बजे तक यह 40 डिग्री के करीब पहुंच जाता है. मौसम विभाग ने आनेवाले दिनों में तापमान और बढ़ने की चेतावनी दी है, जिससे हालात और गंभीर होने की आशंका है. इस भीषण गर्मी के बीच सबसे बड़ी समस्या पेयजल की बनी हुई है. प्रखंड के कई क्षेत्रों में जलमीनार ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लोग दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं. इस समस्या का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है. जिन्हें पानी के लिए रोजाना कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. स्थानीय लोगों की मानें, तो गांवों में हर घर नल योजना भी कारगर साबित नहीं हो रही है.

प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल : पिछले वर्ष भी गर्मी के दौरान यही समस्या सामने आयी थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला. प्रशासनिक उदासीनता पर अब सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द बंद पड़े जलमीनारों को ठीक करवा जाये और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, जिससे कि उन्हें गर्मी में हत मिल सके.

चापाकल ठीक करने के लिए एसडीएम ने नियुक्त किये कर्मी : इधर, भीषण गर्मी को देखते हुए एसडीएम द्वारा खराब पड़े चापाकलों की मरम्मति के लिए पंचायतों में कर्मी नियुक्त किए गए हैं. कर्मियों का मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किया गया है, ताकि ग्रामीण कर्मियों से संपर्क कर चापाकल दुरुस्त करवा सकें.

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Published by: Pradeep kumar

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