Giridih News :भक्तों को अपने भावों का निरीक्षण करना चाहिए : प्रमाण सागर

Giridih News :मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कहा कि भक्तों को भगवान से अधिक अपने भावों का निरीक्षण करना चाहिए. मूर्ति भले ही पाषाण की हो, पर हमारे भाव चेतन हैं.

जब भाव पूर्णतः निर्मल और विशुद्ध हो जाते हैं, तब उसी पाषाण में भी परमात्मा के साक्षात् दर्शन होने लगते हैं. मुनि श्री गुनायतन एवं तेरहपंथी कोठी परिसर में भव्य पंच कल्याणक महामहोत्सव के प्रथम दिन गर्भातरण के पावन अवसर पर प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे.

अनुष्ठानों से गुलजार है सम्मेद शिखर

इससे पूर्व गुणायतन में आयोजित भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ. जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि सम्मेद शिखर इन दिनों धार्मिक कार्यक्रमों से गुलजार है. भक्ति के गूढ़ तत्वों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि तीर्थंकर वीतरागी होते हैं. वे न किसी को कुछ देते हैं और न ही लेते हैं. यदि किसी को विशेष अनुभव, शांति या ऊर्जा प्राप्त होती है, तो वह उसकी अपनी भक्ति, भावों की गहराई और अंतर्मन की विशुद्धता का परिणाम है.

प्रभाव व्यक्ति-विशेष के भावों पर निर्भर

महामहोत्सव के प्रथम दिन अपने संबोधन में मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान की जानेवाली क्रियाएं अभिषेक, पूजन और शांतिधारा सभी के लिए समान होती हैं, पर उनका प्रभाव व्यक्ति-विशेष के भावों पर निर्भर करता है. एक व्यक्ति केवल औपचारिकता निभाता है, जबकि दूसरा उसी पूजा में तन्मय होकर आत्मिक आनंद का अनुभव करता है. अंतर केवल भावों का है. मौके पर मुनि श्री संधान सागर महाराज, मुनि श्री सार सागर, मुनि श्री समादर सागर एवं मुनि श्री रूप सागर सहित संपूर्ण साधु संघ की गरिमामयी उपस्थिति रही.

महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन

गुणायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि रविवार को शंका समाधान सत्र के पश्चात महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया लिधोरा एवं अभय भैया आदित्य ने किया. गौरतलब है कि सभी पात्र सिंगापुर और मलयेशिया से आये श्रद्धालु परिवारों में से चुने गये. सिंगापुर के लगभग 250 तथा मलयेशिया के 35 परिवार इस आयोजन में भाग ले रहे हैं. इससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त हुआ. भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्रमोद-रेखा जैन को प्राप्त हुआ है, जबकि सौधर्म इंद्र की भूमिका प्रशांत-शिल्पा जैन निभायेंगे. कुबेर के रूप में नीलेश, मधु जैन, महायज्ञनायक के रूप में आलोक-अनीता जैन तथा यज्ञनायक की भूमिकाओं में नीलेश, तरु जैन और सिद्धार्थ-नेहा जैन की सहभागिता रहेगी. इसी प्रकार भरत चक्रवर्ती की भूमिका विजय-सीमा पटौदी, बाहुबली के रूप में परेश-अलका जैन, राजा श्रेयांश के रूप में विवेक जैन तथा राजा सोम के रूप में अचिंत्य वैभव-हनी जैन प्रस्तुति देंगे. ध्वजारोहण का पुण्य कार्य ब्रह्मचारी केसी. जैन, श्रीमती पुष्पा जैन एवं निखिलेश जैन संपन्न करेंगे.

अष्टकुमारी एवं 56 देवियां माता की सेवा करेंगी : महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 28 अप्रैल को गर्भकल्याणक के उत्तरार्ध में अष्टकुमारी एवं 56 देवियां माता की सेवा करेंगी तथा माता के 16 स्वप्नों का फलादेश भी प्रस्तुत किया जायेगा. यह जैन परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण और आकर्षक अंग है. उल्लेखनीय है कि शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी मधुबन में सुख, शांति, समृद्धि एवं विश्व कल्याण कारक आचार्य श्री वशुनंदी जी मुनिराज ससंघ (42 पिच्छी) के मंगल सान्निध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव सह विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन श्री मज्जिनेंद्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति मधुबन द्वारा तेरह पंथी कोठी अंतर्गत श्री बिहार, बंगाल, ओडिशा दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमिटी (कोलकाता) में आयोजित किया गया है.

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By PRADEEP KUMAR

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