एक के बाद एक ध्वस्त हो रहे भवन, लंकास्टर अस्पताल पर भू-धंसान का बड़ा खतरा

गिरिडीह के लंकास्टर अस्पताल परिसर में अवैध खनन के कारण फिर भू-धंसान हुआ है, जिससे तीसरा भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया। इलाके में दहशत का माहौल है.

गिरिडीह. सीसीएल गिरिडीह कोलियरी अंतर्गत बनियाडीह स्थित ब्रिटिशकालीन लंकास्टर अस्पताल परिसर में गुरुवार की शाम करीब चार बजे एक बार फिर भू-धंसान की घटना हुई. भू-धंसान के कारण अस्पताल परिसर के एक भवन की दीवार भरभरा कर गिर गयी. घटना के समय भवन में कोई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया. भवन में जगह-जगह दरारें भी पड़ गयी हैं. घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया.

घटना की सूचना मिलते ही सीसीएल गिरिडीह कोलियरी के महाप्रबंधक कन्हैया शंकर गैवाल, परियोजना पदाधिकारी जीएस मीणा, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ परिमल सिन्हा, डॉ अनुराग कुमार, अनिल पासवान, रामानंद कुमार, झामुमो प्रखंड मीडिया प्रभारी अंकित सहाय समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और भू-धंसान प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया. घटना के बाद अस्पताल परिसर में तैनात कर्मियों को तत्काल बाहर निकालकर खुले मैदान में लाया गया. जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर बाद अचानक अस्पताल के एक भवन की दीवार गिर गयी. भवन में दरारें पड़ने के बाद कर्मियों ने तत्काल सीसीएल प्रबंधन को इसकी सूचना दी. एक के बाद एक भवनों के क्षतिग्रस्त होने से परिसर में रहने वाले कर्मचारियों और आसपास के लोगों में भय का माहौल है. अस्पताल परिसर का नजारा भी काफी डरावना हो गया है.

अवैध खनन से भवन के पीछे का हिस्सा हुआ खोखला

लंकास्टर अस्पताल परिसर में 25 अगस्त को भी भू-धंसान की घटना हुई थी. बताया जाता है कि अस्पताल परिसर के पीछे महुआपथारी क्षेत्र में कोयले के अवैध खनन के कारण जमीन के अंदर का हिस्सा खोखला हो गया है. इसी वजह से बारिश के दौरान भू-धंसान की घटनाएं हो रही हैं. 25 अगस्त की घटना में अस्पताल परिसर के दो भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये थे. गुरुवार को तीसरा भवन भी इसकी चपेट में आ गया.

पूर्व की घटना के बाद सीसीएल प्रबंधन ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए ऑफिसर्स क्लब में ओपीडी सेवा शुरू कर चिकित्सा सुविधा बहाल कर दी थी. हालांकि अस्पताल परिसर में अभी भी कई आवश्यक सामग्री मौजूद थी और उसकी देखरेख के लिए कुछ कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया था. अब तीसरे भवन के भी क्षतिग्रस्त होने के बाद परिसर को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है.

कोयला माफियाओं की करतूत से ऐतिहासिक धरोहर पर संकट

लंकास्टर अस्पताल लंबे समय से क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा का प्रमुख केंद्र रहा है. लेकिन अस्पताल के पीछे महुआपथारी इलाके में वर्षों से जारी अवैध कोयला खनन ने इस ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है. बताया जाता है कि कोयला तस्करों द्वारा मजदूरों के माध्यम से अवैज्ञानिक तरीके से कोयले की कटायी करवायी जाती रही है. इससे जमीन के अंदर का हिस्सा खोखला हो गया है और बारिश के दौरान जमीन धंसने लगी है.

कर्मचारियों का कहना है कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने में सुरक्षा विभाग नाकाम रहा है. उनका आरोप है कि कई बार अवैध खनन के बाद डोजरिंग की गयी, लेकिन संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से अवैध खनन करने वालों का मनोबल बढ़ता गया. इसका खामियाजा अब सरकारी संपत्ति को भुगतना पड़ रहा है.

जानकारों के अनुसार, बनियाडीह मुख्य मार्ग की ओर भी जमीन के अंदर काफी हिस्से में कोयला निकाले जाने की बात सामने आती रही है. ऐसे में आने वाले वर्षों में आसपास के अन्य इलाके भी भू-धंसान की चपेट में आ सकते हैं. महुआपथारी के अलावा कबरीबाद, ओपेनकास्ट परियोजना के आसपास, सेंट्रलपीट, पतरोडीह और बेहरावाटांड़ समेत गिरिडीह कोलियरी के कई क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं. अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग एक बार फिर तेज हो गयी है.

परिसर में रहने वालों को कराया जायेगा शिफ्ट : महाप्रबंधक

सीसीएल गिरिडीह कोलियरी के महाप्रबंधक कन्हैया शंकर गैवाल ने कहा कि पूर्व में किये गये अवैध कोयला खनन के कारण भू-धंसान की स्थिति बनी है. 25 अगस्त की घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी करा दी गयी थी और खतरे को देखते हुए ऑफिसर्स क्लब में ओपीडी सेवा शुरू की गयी थी. गुरुवार को पुन: भू-धंसान की घटना हुई है.

उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त अस्पताल भवन को डिमोलिश कर गिराया जायेगा और परिसर में मौजूद सभी सामानों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया है. अस्पताल परिसर में रहने वाले कर्मचारियों को भी दूसरे स्थान पर भेजा जायेगा. उन्होंने कहा कि पूरा इलाका खतरे से भरा है. आसपास रहने वाले लोगों से भी सपरिवार सुरक्षित स्थान पर चले जाने की अपील की गयी है. शुक्रवार से माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जायेगा.

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By Suraj kumar sinha

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