देवरी प्रखंड के काली पूजा का सबसे प्राचीन इतिहास पतरवा (परसाटांड़) गांव की है. यहां स्थित मंदिर में 113 वर्षों से भी अधिक समय से पूर्व की जा रही है. पूजा के दूसरे दिन यहां पर मेले का भी आयोजन किया जाता है. पूजा में पतरवा व मनकडीहा गांव के लोग सक्रिय रहते हैं.
चिकनाडीह में 108 वर्ष से हो रही पूजा
चिकनाडीह गांव स्थित काली मंदिर में 108 वर्षों से पूजा हो रही है. बताया जाता है कई दशक पूर्व चिकनाडीह के बद्री पांडेय के साथ राय (घटवार) परिवार मिलकर गांव में सुख-शांति और खुशहाली के लिए मां काली पूजा की शुरुआत की थी, जो आज तक जारी है. इधर, प्रखंड के मनकडीहा गांव में सात वर्षों से पूजा हो रही है. गांव के परमेश्वर दास ने यहां पूजा की शुरुआत की और अभी भी इसका नेतृत्व कर रहे हैं. वहीं, हरियाडीह गांव में वर्ष 2006 में स्थानीय लोगों ने कमेटी गठित कर पूजा की शुरुआत की थी. आयोजन में भुवनेश्वर हाजरा, उमेश हाजरा, जनार्दन हाजरा, ढालो हाजरा, संतोष हाजरा, रंजीत हाजरा, बहादुर हाजरा, अशोक हाजरा आदि योगदान दे रहे हैं. इधर सलैयाटांड़ (भेलवाघाटी) व असको व घोरंजी में भी पूजा को तैयारी पूरी कर ली गयी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
