Giridih News: विकास की दौड़ में पीछे रह गया देवरी का जेवड़ा गांव

Giridih News: जब कोई बीमार पड़ता है तो विकट स्थिति पैदा हो जाती है. खासकर प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती काे अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है. महिला को खाट पर लादकर छह किमी दूर मुख्य सड़क पर ले जाना पड़ता है. वहां से महिला को तिसरी ले जाया जाता है. कई बार तो स्थिति गंभीर हो जाती है. यहां के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में दो शिक्षक हैं. इस कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती है.

प्रखंड मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर जंगलों के बीच बसा खटौरी पंचायत का जेवड़ा गांव. कोडरमा सांसद सह केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के गोद लिये पंचायत के इस गांव का हाल बेहाल है. इस गांव में ना संपर्क सड़क है, ना ही शुद्ध पानी की व्यवस्था है. सुविधा के नाम पर बिजली व स्कूल है. पेयजलापूर्ति के लिए जलमीनार तो लगा दिया, लेकिन ग्रामीणों को आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला. संपर्क सड़क के अभाव में जंगल की पथरीली व ऊबड़-खाबड़ पगडंडीनुमा सड़क से आवागमन करना पड़ता है. विकट स्थिति तब पैदा हो जाती है, जब कोई बीमार पड़ता है.

गुंजरी नदी पर नहीं बना पुल, बारिश में होती है परेशानी

गांव के करीब से बहने वाली गुंजरी नदी पर आज तक पुल नहीं बना. पुल के अभाव में ग्रामीणों को बरसात में नदी पार करने में परेशानी होती है. इस नदी में सालों भर पानी रहता है. पुल नहीं होने के चलते चारपहिया वाहन गांव तक नहीं आते हैं. गांव के अधिकांश बच्चे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं. धातृ महिलाओं व बच्चों को सरकारी सुविधा नहीं मिलती है, क्योंकि गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है. टीकाकरण के लिए बच्चों को दूसरे गांव ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत प्रतिनिधि, सांसद-विधायक व अधिकारियों को कई बार गांव की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ. ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता है कि वह अपनी व्यथा किसके पास रखें.

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By MAYANK TIWARI

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