जमुआ प्रखंड क्षेत्र में पिछले चार महीनों से वृद्धावस्था पेंशन की राशि नहीं मिलने से बुजुर्ग लाभुकों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है. नियमित पेंशन के सहारे दवा, राशन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने वाले लाभुक अब उधार के सहारे जीवनयापन करने को मजबूर हैं. लाभुकों का कहना है कि उन्होंने समस्या के समाधान के लिए पंचायत स्तर पर मुखिया दरबार से लेकर स्थानीय विधायक प्रतिनिधि और प्रखंड कार्यालय तक गुहार लगायी, लेकिन अब तक लंबित राशि का भुगतान नहीं हुआ है.
दवा खरीदना हुआ मुश्किल, दुकानदारों से लेना पड़ रहा उधार
पेंशन बंद होने का सबसे अधिक असर बुजुर्ग और बीमार लाभुकों पर पड़ रहा है. कई लाभुक नियमित दवाइयों का खर्च भी पेंशन की राशि से चलाते थे. राशि नहीं मिलने के कारण दवा खरीदने में परेशानी हो रही है. वहीं, राशन और दैनिक जरूरतों के लिए स्थानीय दुकानदारों से उधार लेना पड़ रहा है. लाभुकों का कहना है कि लगातार उधार बढ़ने के कारण अब दुकानदार भी सामान देने में आनाकानी करने लगे हैं.
चार महीने से खाते में नहीं आयी राशि
लाभुकों के अनुसार, हर महीने पेंशन मिलने की उम्मीद में वे बैंक खाते की जांच करते हैं, लेकिन खाते में राशि नहीं पहुंची है. समस्या को लेकर कई बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें भुगतान शुरू होने का आश्वासन ही मिलता रहा.
काजीमघा की 72 वर्षीय मुन्नी खातून ने बताया कि पिछले चार महीने से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली है. उम्र अधिक होने के कारण मजदूरी करना संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि बीपी और शुगर की दवाइयों पर हर महीने करीब 500 से 600 रुपये खर्च होते हैं. पेंशन से दवा और रोजमर्रा का खर्च चलता था, लेकिन अब दुकान से उधार लेना पड़ रहा है.
अगले महीने आ जाएगी कहकर टालने का आरोप
बाधामारा की अमना बीबी ने बताया कि पिछले चार-पांच महीनों से खाते में पेंशन नहीं आयी है. बैंक जाने पर लंबी कतार में खड़े होने के बाद पता चलता है कि राशि नहीं आयी. उनका कहना है कि दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद हर बार अगले महीने भुगतान होने की बात कही जाती है.
कुबरी की बिसनी देवी ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर है. छोटे-मोटे काम से परिवार का खर्च चलाती हैं. पेंशन बंद होने से बच्चों की स्कूल फीस और घर का राशन जुटाना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि महंगाई के बीच अपने हक की राशि के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है.
कुबरी की बुधनी देवी ने बताया कि उनके पास जमीन-जायदाद या आय का कोई स्थायी साधन नहीं है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन से ही महीने का राशन और रसोई का खर्च चलता था. पेंशन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है और दुकानदार ने भी उधार देना बंद कर दिया है.
क्या कहते हैं बीडीओ
जमुआ के प्रखंड विकास पदाधिकारी अमल जी ने बताया कि तकनीकी कारणों और आधार-बैंक खाते के डीबीटी लिंक अपडेट की प्रक्रिया के चलते कुछ लाभुकों के भुगतान में अस्थायी रुकावट आयी है. मामले का सत्यापन कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी लंबित किस्तों की राशि लाभुकों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जायेगी.
लाभुकों ने जल्द भुगतान की मांग की
चार महीने से भुगतान लंबित रहने के कारण लाभुकों में नाराजगी बढ़ रही है. बुजुर्गों का कहना है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन उनके लिए अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि दवा, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का महत्वपूर्ण सहारा है. उन्होंने प्रशासन से लंबित राशि का जल्द भुगतान कराने और भविष्य में समय पर पेंशन उपलब्ध कराने की मांग की है.
