सुबह हो या शाम, दिन हो या रात बिजली कब गुल हो जायेगी, इसका कोई समय नहीं है. बिजली नहीं रहने से पंखे, कूलर और एसी ठप पड़ जाते हैं. इससे सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को हो रही है. कई मोहल्लों में लो-वोल्टेज की समस्या भी बनी हुई है, जिससे विद्युत उपकरण ठीक से काम नहीं करते हैं. वहीं, ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है. फॉल्ट और देर से बिजली बहाल होने के कारण लोगों को अंधेरे में रहना मजबूरी है. इधर, जिला मुख्यालय के शहरी और मुफस्सिल क्षेत्रों में औसतन 22-23 घंटे प्रतिदिन बिजली आपूर्ति का दावा विभाग कर रहा है. 75 की जगह वर्तमान में केवल 60 एमवीए बिजली की आपूर्ति हो रही है.
तापमान बढ़ने से बढ़ी तकनीकी परेशानी, सुधार के लिए किए जा रहे प्रयास: जीएम
बिजली विभाग के जीएम शकील आलम ने बताया कि तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण कई स्थानों पर फ्यूज जलने और तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आ रही हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए मरम्मत कार्य आवश्यक हो जाता है. इसके दौरान शटडाउन लेना पड़ता है. इसी कारण अलग-अलग इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बाधित होती है. उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं, विशेषकर रात के समय, को कम से कम परेशानी हो, इसे ध्यान में रखते हुए रात नौ बजे के बाद फुल पावर के साथ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. विभाग का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर कर व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके. बिजली आपूर्ति को सुचारु रखने के लिए विभाग लगातार निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रहा है.गांडेय : फॉल्ट, पावर कट व लो वोल्टेज, 22 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा
उमस भरी गर्मी के बीच बिजली की आंख मिचौनी से उपभोक्ता परेशान हैं. हालांकि मैन पावर की कमी के बीच विभाग 22 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रहा है. करीब दो लाख की आबादी और 274 गांव वाले गांडेय प्रखंड में स्थापित सब स्टेशन के छह फीडर गांडेय, सिजुआ, बरियारपुर, अहिल्यापुर, देवपुर और ताराटांड़ से बिजली आपूर्ति की जा रही है. यहां दो सरकारी कर्मी जेम्स तिग्गा (लाइन मैन) व विजय कुमार कुशवाहा (जूनियर लाइन मैन) स्थापित है. इसके अलावे आउटसोर्सिंग कंपनी के तहत कुछ मिस्त्री, कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं. आउटसोर्सिंग कंपनी के ऑपरेटर कन्हैया कुमार ने बताया कि गांडेय में 12/13 एमवीए बिजली की आवश्यकता है. ग्रिड में प्रॉब्लम के कारण 33 हजार वोल्ट के स्थान पर 26 हजार वोल्ट बिजली आती, जिससे परेशानी होती है. कभी फॉल्ट, कभी लो वोल्टेज तो कभी बिजली कट की समस्या के बीच 22 घंटे विद्युतापूर्ति की जा रही है.सरिया में 20 की जगह सात मेगावाट हो रही बिजली आपूर्ति
सरिया प्रखंड इन दिनों बिजली की हो रही कटौती से उपभोक्ता काफी परेशान हैं. निर्बाध बिजली नहीं मिलने से जलापूर्ति की समस्या पैदा हो रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरिया व बगोदर में 18-20 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, लेकिन सात से दस मेगावाट बिजली आपूर्ति की जा रही है जो उपभोक्ताओं के लिए इस चिलचिलाती धूप व गर्मी में नाकाफी है. विद्युत कर्मियों ने भी नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि सरिया व बगोदर में कभी साथ तो कभी आठ मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है. इसके कारण क्षेत्र में लोड शेडिंग कर आपूर्ति की जाती है.तिसरी : 10-12 घंटे ही मिल रही बिजली
तिसरी प्रखंड में इन दिनों बिजली आपूर्ति पूरी तरह से चरमरा गयी है. 24 घंटे में यहां बिजली बमुश्किल 10-12 घंटे ही मिल रही है. इसके बाद भी लगातार मुश्किल से एक घंटे भी बिजली नहीं रहती है. भीषण गर्मी में बिजली की आंख-मिचौनी से आम लोग काफी परेशान हैं. बुधवार की सुबह साढ़े तीन बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही और उपभोक्ता दिनभर गर्मी में परेशान रहे. उपभोक्ताओं की मांग है कि तिसरी में सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति बहाल हो.बगोदर : जरूरत 17 मेगावाट बिजली की, आपूर्ति सात मेगावाट
बगोदर समेत आसपास के क्षेत्रों में बिजली निर्बाध तरीके से नहीं मिल रहा है जिससे इस भीषण गर्मी में बिजली उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बगोदर में महज 14-15 घंटे ही बिजली मिल रही है. बता दें कि बगोदरडीह पवार सब स्टेशन को सरिया पावर सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति हो रही है जिसमें बगोदर-सरिया को 16-17 मेगावट मिलनी चाहिए. लेकिन इस गर्मी में मात्र 6-7 ही मेगावाट मिल पा रहा है, जिसमें बगोदर भी शामिल है. इधर बिजली की नियमित आपूर्ति भी नहीं हो रही है. बिजली सुबह के पांच बजे एक घंटे के लिए गुल होती है. इसके बाद दिन में करीब तीन-चार घंटे बाधित रहती है. रात में भी अचानक बिजली गुल होती है जिससे उपभोक्ताओं में परेशानी बनी हुई है.जमुआ : 35 मेगावाट की जगह 25 मेगावाट बिजली की आपूर्ति
जमुआ प्रखंड में अनियमित बिजली आपूर्ति से लोग परेशान हैं. बिजली की किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. विभागीय एसडीओ सुंदर कुमार राम ने कहा कि जमुआ में बिजली की कुल खपत लगभग 35 मेगावाट है, लेकिन विभाग से 25 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध करायी जा रही है. 10 मेगावाट का अंतर होने के कारण विभाग को विवश होकर लोड शेडिंग करनी पड़ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी खराब है, जहां दिनभर में मात्र 8-10, घंटे ही बिजली मिल रही है.
