साइबर अपराधी बेंगाबाद सामुदायिक अस्पताल की प्राइवेसी डाटा में सेंध लगाकर लाभार्थियों को जाल में फंसाने का काम कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थियों को फोन कर सटीक जानकारी बताकर सरकारी सुविधा का लाभ लेने का झांसा देकर ठगी कर रहे हैं. इससे ग्रामीण लाभुक साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं.
वहीं कुछ लाभार्थियों ने इसकी जानकारी अपने गांव के सहिया को दी है. इधर, अस्पताल की प्राइवेसी डाटा साइबर अपराधियों के पास कैसे पहुंची इसकी जांच की मांग उठने लगी है. फिलहाल लाभार्थियों के पास साइबर अपराधियों के फोन काॅल से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.
क्या है मामला ?
बताया जाता है कि साइबर अपराधी ठगी के लिए अपनी योजनाओं को समय-समय पर बदलते रहते हैं. बेंगाबाद सामुदायिक अस्पताल के लाभार्थियों की सूची हासिल कर अपराधी लाभार्थियों के मोबाइल नंबर में फोन कर बच्चा होने का समय, माता व बच्चे का नाम, घर सहित अन्य जानकारी देते हुए सरकारी योजना से मोटी रकम दिलाने का झांसा दे रहे हैं. अपराधी लाभुकों से पैसे फोन पे के माध्यम से मांग रहे हैं. इसमें से कुछ लाभुक झांसे में आकर पैसे भेज भी चुके हैं. छानबीन में जब सच्चाई सामने आई तो लाभुकों के होश उड़ गये हैं.
एक ही गांव से आधा दर्जन लाभुकों को आया काॅल
इधर, महुआर के कौशल्या देवी, काजल कुमारी, पूनम देवी, सावित्री कुमारी सहित आधा दर्जन लाभुकों को फोन आया. फोन करने वाले व्यक्ति खुद को सामुदायिक अस्पताल का कर्मी शेखर बताता है. फोन कर डिलीवरी के लिए भर्ती होने से छुट्टी होने तक की सटीक जानकारी दे रहे हैं. साथ ही अस्पताल की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर भरोसा में लेते हुए एडवांस में एक हजार से दस हजार तक की मांग कर रहा है.
इसमें से एक महिला ने दस हजार तो एक ने एक हजार रुपये उक्त व्यक्ति के फोन पे में भेज चुकी है. जब दिन प्रतिदिन अन्य महिलाओं को फोन आने का सिलसिला बढ़ने लगा तो लोगों को शंका हुई. फिलहाल अस्पताल से डाटा लीक होने से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है. इधर, अस्पताल प्रबंधक अरविंद कुमार का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है. यहां कोई शेखर नाम का कर्मी कार्यरत नहीं है. मामले की छानबीन की जायेगी.
