Giridih News :रिसीविंग चालान व पावती को छोड़ उठाव पंजी से पेमेंट एडवाइस बना कर दिया ट्रांसपोर्टर को भुगतान

Giridih News :किसी भी ट्रांसपोर्टर का भुगतान तभी किया जाता है, जब वह टेंडर के अनुरूप निर्धारित स्थल से सामग्री का उठाव कर निर्धारित स्थल पर सामग्री पहुंचा देता है. लेकिन, गिरिडीह में अधिकारियों ने इससे अलग हटकर ट्रांसपोर्टर का भुगतान किया है.

यहां अमित कुमार सिंह नामक ट्रांसपोर्टर को एफसीआई के तीन अलग-अलग गोदामों से जिले के 13 प्रखंडों में बने जेएसएफसी के गोदामों में जन वितरण प्रणाली का सरकारी अनाज पहुंचाने का टेंडर मिला था. जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्टर अमित ने जितनी मात्रा में एफसीआई के गोदाम से अनाज का उठाव किया, उसे उतनी ही मात्रा में जेएसएफसी के गोदामों तक नहीं पहुंचाया, बल्कि रास्ते से ही कई ट्रक अनाज गायब कर दिया गया. भारी मात्रा में उस दौरान अनाज कालाबाजार में टपा दिया गया था. बावजूद इसके अधिकारियों की मिलीभगत से ट्रांसपोर्टर को ढुलाई विपत्र का भुगतान कर दिया गया. इस हेराफेरी की कलई उजागर न हो जाये, इसके लिए अधिकारियों ने रिसीविंग चालान और पावती पंजी से पेमेंट एडवाइस बनाने के बदले उठाव पंजी से ही पेमेंट एडवाइस बनाकर अमित कुमार सिंह नामक ट्रांसपोर्टर को दो किस्तों में 1.40 करोड़ रूपये का भुगतान कर दिया.

ट्रक का चारों चालान गायब, अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

बता दें कि ट्रांसपोर्टिंग के दौरान चार प्रतियों में ट्रक चालान जारी किया जाता है. इसमें से दो चालान प्रखंडों में स्थित गोदामों के सहायक गोदाम प्रबंधक को दिया जाता है, जिसमें से एक चालान रिसीव कर ट्रांसपोर्टर को वापस कर दिया जाता है. जबकि तीसरी प्रति जेएसएफसी के जिला कार्यालय को समर्पित की जाती है और चौथी प्रति उठाव प्रभारी के पास होता है. यहां गौरतलब बात यह है कि ट्रांसपोर्टर समेत चारों प्रति में जारी किये गये ट्रक चालान गायब बताये जा रहे हैं. अनाज हेराफेरी की असलियत सामने न आ जाये, इसके लिए अधिकारियों ने उठाव पंजी से ही ट्रांसपोर्टर को भुगतान करने की साजिश रच दी. इस अवैध भुगतान की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए अधिकारियों के पत्राचार के क्रोनोलोजी को समझना होगा. सबसे पहले ट्रांसपोर्टर अमित कुमार सिंह ने खाद्य आपूर्ति विभाग को अनाज ढुलाई के भुगतान के लिए एक स्मार पत्र दिया जिसके आलोक में सरकार के उप सचिव रामकृष्ण कुमार ने जेएसएफसी के प्रबंध निदेशक को एक पत्र लिखते हुए 15 दिनों के अंदर व्यक्ति रूचि लेते हुए समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और इस पत्र के आलोक में प्रबंध निदेशक और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गिरिडीह के जिला प्रबंधक सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी को व्यक्ति रूचि लेते हुए सात दिनों के अंदर मामले का समाधान करने के लिए निर्देशित किया. इसके बाद जिला स्तर पर उठाव पंजी से ही पेमेंट एडवाइस बनाकर भुगतान करने के लिए अनुशंसा कर दी गयी. पेमेंट एडवाइस में जेएसएफसी के तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह जिला प्रबंधक गुलाम समदानी, वरीय सहायक प्रबंधक स्वतंत्र कुमार और एकाउंटेंट नाजिया परवीन के हस्ताक्षर हैं.

प्रबंधक निदेशक ने पत्राचार में स्वीकारी चारों ट्रक चालान गायब होना घोर अनियमितता

आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रबंध निदेशक सत्येंद्र सिंह ने पत्राचार के दौरान खुद स्वीकार किया है कि चारों ट्रक चालान का गायब होना घोर अनियमितता को दर्शाता है. वहीं जिला प्रबंधक गुलाम समदानी ने एनआइसी रांची से मांगें जाने पर खाद्यान्न परिवहन से संबंधित प्रतिवेदन एक्सल शीट के माध्यम से ह्वाट्स एप पर उपलब्ध कराने और ऑनलाइन डाटा नहीं देने की बात खुद स्वीकार की है. जिला प्रबंधक समदानी ने यह भी स्वीकार किया है कि उनके लागिंग आईडी पर नवंबर 2018 से मार्च 2019 का डाटा उपलब्ध नहीं है. इसके बाद भी इन अधिकारियों ने सात वर्ष के बाद उठाव पंजी से ही खाद्यान्न परिवहन का प्रतिवेदन तैयार कर ट्रांसपोर्टर को राशि का भुगतान कर दिया. इस बाबत पूछे गये सवाल पर जिला प्रबंधक का कहना है कि भुगतान में कोई गड़बड़ी नहीं की गयी है. भुगतान जिला से नहीं होता है, प्रबंध निदेशक के यहां से होता है. जेएसएफसी से भुगतान के लिए आदेश था. कुल मिलाकर प्रावधानों से हटकर ट्रांसपोर्टर को भुगतान करने के मामले में अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आ गयी है.

उठाव पंजी और प्राप्ति पंजी की जांच से खुलेंगे कई राज

सच तो यह है कि झारखंड राज्य खाद्य निगम के द्वारा खाद्यान्न का उठाव कर प्रखंडों के गोदामों में पहुंचाने से लेकर लाभुकों के बीच अनाज वितरण की भूमिका पर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि सात वर्ष पूर्व नवंबर 2018 से लेकर मार्च 2019 के बीच अनाज वितरण में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गयी थी और कई ट्रकों के अनाज को गायब कर दिया गया था. यही कारण है कि रिसीविंग चालान यानि गोदामों में डिलीवरी किये गये अनाज से संबंधित चालान से भुगतान न कर उठाव पंजी से कर दी गयी है. सूत्रों का कहना है कि आज भी प्राप्ति पंजी प्रखंडों के गोदामों में सहायक गोदाम प्रबंधक के पास उपलब्ध है. यदि अधिकारी चाहते, तो जिले के सभी 13 प्रखंडों के सहायक गोदाम प्रबंधकों से प्राप्ति पंजी से अनाज परिवहन से संबंधित प्रतिवेदन आसानी से प्राप्त कर सकते थे. लेकिन, सात वर्षों तक भुगतान के लिए अधिकारी उचित अवसर की तलाश में लगे रहे. यदि सहायक गोदाम प्रबंधकों के प्राप्ति पंजी से आंकड़ें निकाले जायें और एफसीआई के उठाव पंजी से आंकड़ों का मिलान किया जाये, तो कई चौंकाने वाले राज सामने आ जायेंगे. इस मामले में यह भी खुलासा हो जायेगा कि कितना ट्रक अनाज एफसीआई गोदाम से जेएसएफसी के गोदाम के लिए चला था जो निर्धारित गोदामों तक पहुंचा ही नहीं और गरीबों का अनाज कालाबाजार में चला गया. इस मामले में अनाज गायब से संबंधित ना ही अब तक कहीं प्राथमिकी दर्ज की गयी है और ना ही ट्रांसपोर्टर के विरुद्ध कोई कार्रवाई ही की गयी है. बताया जा रहा है कि ट्रांसपोर्टर अमित कुमार सिंह को 24 महीने के लिये टेंडर मिला था, लेकिन वह आठ माह में ही कार्य कर भाग गया. इसके बाद भी ट्रांसपोर्टर को काली सूची में डालने, जमानत राशि जब्त करने, गायब अनाज की रिकवरी करने के बजाये अधिकारियों ने अवैध तरीके से ट्रांसपोर्टिंग के मद में मोटी रकम का भुगतान भी कर दिया. इसमें वह राशि भी शामिल है जिसकी ढुलाई तक नहीं हुई है.

(राकेश सिन्हा, गिरिडीह)B

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Author: PRADEEP KUMAR

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