अपनी मांगों को लेकर कर्मियों ने सिविल सर्जन डॉ बच्चा प्रसाद सिंह को शुक्रवार को ज्ञापन सौंपा और जल्द कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी. सौंपे गये ज्ञापन में कर्मियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि लगातार चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि परिवारों का भरण-पोषण, बच्चों की स्कूल फीस, जरूरी चिकित्सा और रोजमर्रा की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना भी अब उनके लिए दूभर हो गया है.
हो रहा सौतेला व्यवहार
आउटसोर्स कर्मी संघ के जिलाध्यक्ष मो आफताब आलम ने कहा कि हम दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इसके बावजूद हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. ना तो समय पर वेतन मिल रहा है और ना ही श्रम विभाग द्वारा तय की गयी बढ़ी हुई मजदूरी दर का लाभ दिया जा रहा है. वार्ता के दौरान आउटसोर्स कर्मियों ने सिविल सर्जन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी. पिछले चार महीनों का बकाया वेतन तुरंत जारी करने, श्रम विभाग की गाइडलाइंस के अनुरूप बढ़ी हुई मजदूरी दर से वेतन निर्धारण होने, आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगे और सेवा संबंधी अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग रखी.
सीएस ने मांगा एक सप्ताह का समय
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने कर्मियों से एक सप्ताह का समय मांगा है और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. सिविल सर्जन के आश्वासन के बाद कर्मियों ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं की गयी, तो वे शांत नहीं बैठेंगे. सभी कर्मी लोकतांत्रिक तरीके से आगामी 20 जून से कार्य बहिष्कार और आंदोलन करने को बाध्य होंगे. कर्मियों ने साफ कहा कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति या स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और आउटसोर्सिंग एजेंसियों की होगी. मौके पर जेएलकेएम के केंद्रीय संयुक्त महासचिव नागेंद्र चंद्रवंशी, नगर अध्यक्ष आकाश विश्वकर्मा, सक्रिय सदस्य अशोक मल्हा, भुनेश्वर चौधरी, कुमार सानू, तारिक अनवर, राजन हाड़ी, मंगर हाड़ी, राजेश हरिजन, विशाल हरिजन, लखन यादव समेत भारी संख्या में आउटसोर्स कर्मी मौजूद थे.
